भोपाल:– राजधानी इन दिनों भीषण हीट वेव (लू) की चपेट में है। आसमान से बरसती आग और 44 डिग्री के पार पहुंचे तापमान ने शहर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भारी दबाव बढ़ा दिया है। पिछले सात दिनों के भीतर शहर के तीन बड़े सरकारी अस्पतालों हमीदिया, जेपी और एम्स की ओपीडी तथा इमरजेंसी वार्डों में मरीजों की संख्या में 30 फीसदी तक का बड़ा उछाल आया है।
सुबह 10 बजे से ही पर्चा काउंटरों और डॉक्टरों के कमरों के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। स्थिति यह है कि लगातार बढ़ती भीड़ के कारण अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड पूरी तरह पैक नजर आ रहे हैं।
कॉर्डियोलॉजी और मेडिसिन विभाग के डाक्टरों के अनुसार, रात में तापमान कम न होने और नींद पूरी न होने के कारण ब्लड प्रेशर (बीपी), हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में अचानक तेजी आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार पहले हीट स्ट्रोक के मामले केवल कड़कती धूप में बाहर काम करने वाले मजदूरों या लोगों में देखे जाते थे, लेकिन इस बार हालात बदल चुके हैं और घरों के अंदर रहने वाले लोग भी इसके शिकार हो रहे हैं। शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचते ही स्थिति जानलेवा हो सकती है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अब हीट स्ट्रोक के मामलों को ‘हेल्थ इमरजेंसी’ की तरह ले रहा है।
क्या है सीवीटी (CVT) और क्यों बढ़ रहा है इसका खतरा?
हमीदिया अस्पताल में न्यूरोलोजिस्ट डॉ.आयुष दुबे के अनुसार भीषण गर्मी और डिहाइड्रेशन के कारण हीट स्ट्रोक के करीब 20 % मरीजों में सीवीटी (सेरेब्रल वेनस थ्रोम्बोसिस) की स्थिति देखी जा रही है।
ऐसे जमता है खून: जब शरीर का तापमान 40 डिग्री के पार जाता है, तो पसीने के जरिए पानी और नमक तेजी से खत्म होता है। पर्याप्त पानी न मिलने पर खून गाढ़ा होने लगता है।
नस फटने का डर: दिमाग की ड्रेनेज नसों (वेनस साइनस) में खून गाढ़ा होने से थक्का जम जाता है। समय पर इलाज न होने से दिमाग में प्रेशर (ICP) अचानक बढ़ जाता है, जिससे दिमाग की नस फटने या ब्रेन हेमरेज का खतरा रहता है। शुरुआती स्टेज में ब्लड थिनर दवाओं से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।
इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज:
अगर आपको या परिवार में किसी को ये संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, यह सीवीटी का संकेत हो सकता है:
लगातार सिरदर्द: धूप से आने के बाद होने वाला वह तेज सिरदर्द जो पेनकिलर (दर्द निवारक दवा) खाने से भी ठीक न हो।
जी मिचलाना व उल्टी: सिरदर्द के साथ अचानक तेज उल्टियां होना।
आंखों के आगे अंधेरा: धुंधला दिखाई देना या अचानक डबल विजन (एक की जगह दो दिखना) की शिकायत।
दौरे या बेहोशी: चक्कर खाकर अचानक गिर जाना या शरीर के किसी एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नता महसूस होना।
भोपाल के शाकिर अली अस्पताल में एमडी मेडिसिन डॉ. प्रीतेश सिंह के अनुसार बचाव के 3 सबसे जरूरी उपाय सबसे ज्यादा जरूरी हैं:
- लिक्विड की मात्रा बढ़ाएं: हर घंटे 1 से 2 गिलास पानी जरूर पीएं। दिनभर में कम से कम 4 लीटर लिक्विड शरीर में जाना चाहिए।
- नेचुरल ड्रिंक्स लें: सादे पानी के साथ-साथ नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और ओआरएस (ORS) के घोल का नियमित सेवन करते रहें।
- धूप से बचें: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। बाहर निकलते समय सिर और कान को सूती कपड़े या टोपी से अच्छी तरह ढकें।
विशेषज्ञों ने दी ये गंभीर चेतावनी:
घर के अंदर भी खतरा: 43 डिग्री से ऊपर जा रहे पारे, उमस और खराब वेंटिलेशन के कारण अब घरों के भीतर रहने वाले लोग भी हो रहे हीट स्ट्रोक के शिकार।
सीवीटी (CVT) का बढ़ा जोखिम: हीट स्ट्रोक के 20% मरीजों के दिमाग की नसों में खून जमने (थक्का बनने) और ब्रेन हेमरेज जैसी खतरनाक स्थिति का दावा।
हाई रिस्क ग्रुप: बुजुर्ग, छोटे बच्चे, डायबिटीज और दिल के मरीजों के लिए मौजूदा मौसम सबसे ज्यादा जानलेवा।
