नई दिल्ली:– रक्षाबंधन के मौके पर बहनों ने इस बार भाई की कलाई पर बांधने वाले पारंपरिक रक्षा सूत्र को तकनीक से जोड़ते हुए एक अनोखी पहल की है। वाराणसी के जूनियर साइंटिस्ट श्याम चौरसिया के नेतृत्व में छात्राओं ने देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के लिए AI सोलर सोल्जर सेफ्टी राखी का प्रोटोटाइप तैयार किया है। देखने में यह राखी जैसी है, लेकिन इसमें कई आधुनिक तकनीकी उपकरण लगाए गए हैं।
छात्राओं का कहना है कि इस राखी के जरिए वे रक्षाबंधन की भावना को देश की सुरक्षा में जुटे जवानों तक पहुंचाना चाहती हैं। प्रोटोटाइप का उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों में जवानों के बीच संचार और सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं में मदद करना बताया गया है।
राखी में लगाए गए आधुनिक तकनीकी उपकरण
AI सोलर सोल्जर सेफ्टी राखी में 2.1 इंच डिस्प्ले, ट्रांसमीटर-रिसीवर, ब्लूटूथ मॉड्यूल, कैमरा, माइक्रोफोन और 3.7 वोल्ट की बैटरी लगाई गई है। प्रोटोटाइप में सोलर आधारित सेल्फ-चार्जिंग सिस्टम भी शामिल किया गया है।
छात्राओं के मुताबिक, इसमें सैटेलाइट आधारित डिस्प्ले और संचार तकनीक का इस्तेमाल करने का प्रयास किया गया है, ताकि मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने वाले क्षेत्रों में भी जवानों के बीच ऑडियो-वीडियो कम्युनिकेशन में मदद मिल सके।
करीब 70 ग्राम वजन, तीन महीने में तैयार
छात्राओं ने इस प्रोटोटाइप को हल्का रखने का प्रयास किया है। इसका वजन करीब 70 ग्राम बताया गया है। इसे तैयार करने में लगभग तीन महीने का समय लगा और इसकी अनुमानित लागत करीब एक लाख रुपये आई है।
श्याम चौरसिया के मुताबिक, यह एक प्रोटोटाइप है, जिसे जरूरत के अनुसार आगे और बेहतर बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि इस तरह के तकनीकी प्रयोगों का उद्देश्य जवानों की सुरक्षा और संचार व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में नए विचार सामने लाना है।
जवानों की सुरक्षा पर पहले भी काम कर चुके हैं श्याम चौरसिया
जूनियर साइंटिस्ट श्याम चौरसिया इससे पहले भी जवानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई तकनीकी प्रोटोटाइप तैयार कर चुके हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक आर्मी हैंड ग्लव्स, आर्मी एंटी अटैक सिस्टम और AI आर्मी जैकेट जैसे प्रोटोटाइप शामिल बताए जाते हैं।
अब छात्राओं के साथ मिलकर तैयार की गई AI सोलर सोल्जर सेफ्टी राखी के जरिए उन्होंने रक्षाबंधन की पारंपरिक भावना को तकनीक और राष्ट्रसेवा से जोड़ने का प्रयास किया है।
रक्षा मंत्री को भेजा ईमेल, जवानों तक राखी पहुंचाने की मांग
प्रोटोटाइप तैयार होने के बाद छात्राओं और स्कूल प्रबंधन ने रक्षा मंत्री को ईमेल भेजकर जवानों को यह राखी सौंपने के लिए समय मांगा है। छात्राओं की इच्छा है कि उनके हाथों से तैयार की गई यह तकनीकी राखी सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचे।
इसके अलावा छात्राएं वाराणसी स्थित प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय में भी पत्रक देने की तैयारी कर रही हैं। इसके माध्यम से वे जवानों तक राखी पहुंचाने में मदद की मांग करेंगी।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी बना चुके हैं तकनीक
श्याम चौरसिया ने जवानों की सुरक्षा के साथ-साथ महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी तकनीक आधारित कई प्रोटोटाइप तैयार किए हैं। इनमें लिपस्टिक और झुमका जैसे सुरक्षा उपकरण शामिल बताए जाते हैं।
AI सोलर सोल्जर सेफ्टी राखी के जरिए छात्राओं ने तकनीक को भावनाओं से जोड़ने की कोशिश की है। रक्षाबंधन जहां भाई-बहन के बीच सुरक्षा और प्रेम का प्रतीक है, वहीं इस पहल में उसी भावना को देश की सीमाओं पर तैनात जवानों तक पहुंचाने का संदेश दिया गया है।
