छत्तीसगढ़:– लंबे समय तक नक्सल संगठन में सक्रिय रहे और हाल ही में सरेंडर करने वाले टॉप नक्सली लीडर पापाराव ने पहली बार खुलकर अपनी बात कही. पापाराव ने Zee Media से खास बातचीत में नक्सल संगठन के अंदरूनी हालात, हथियार उठाने की वजह और सरेंडर के फैसले तक की पूरी कहानी के बारे में बताया. नक्सली पापाराव का मानना है कि DKSZC के इस बड़े लीडर का सरेंडर सशस्त्र नक्सलवाद के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है
नक्सली पापाराव ने कहा कि ‘मैं पिछले 10 दिनों से लगातार सोच रहा था और अब मैंने फैसला लिया है कि हम हथियारबंद संघर्ष छोड़ देंगे. आगे कहा कि अब हम भारत के संविधान के अनुसार जनता के लिए, जल, जंगल और जमीन के अधिकार के लिए लड़ेंगे. सरकार की समर्पण नीति पर मैं इतना ही कहूंगा कि हमने कई अभियानों में हिस्सा लिया, पुलिस के साथ मुठभेड़ भी हुई, लेकिन हम डरे नहीं. यह कहना गलत है कि डर की वजह से हम पीछे हट रहे हैं. ऐसे संघर्ष से नुकसान भी होता है, संगठन को आगे बढ़ाना है और जनता को फिर से संगठित करना है, इसलिए मैं मुख्यधारा में लौटने का फैसला कर रहा हूं.
‘संविधान के तहत काम करूंगा’
पापाराव ने कहा कि ‘जो साथी अभी जंगल में हैं, उनके लिए मैं अपील करूंगा कि वे भी वापस मुख्यधारा में लौट आएं. पहले मैंने ऐसा सोचा था कि बड़े नेता चले गए तो मैं बस्तर संभाग की जिम्मेदारी संभालूंगा और आंदोलन को आगे बढ़ाऊंगा, लेकिन हालात बदल गए हैं. अब हर जगह फोर्स के कैंप हैं, घूमने की भी जगह नहीं बची है. ऐसे में मैंने सोचा कि संगठन को बचाने और लड़ाई को आगे ले जाने के लिए अब रास्ता बदलना जरूरी है. इसलिए मैंने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में आने का फैसला लिया है और अब संविधान के तहत काम करूंगा.
अपने फैसले से संतुष्ट- पापाराव
आगे कहा कि ‘मैं अपने इस फैसले से संतुष्ट हूं. पहले ऐसा नहीं सोचा था कि यह फैसला लेना चाहिए था, क्योंकि उस समय हालात अलग थे. कुछ साथी चले गए, लेकिन उस समय मुझे उनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिली. अब मैं मानता हूं कि जनता के लिए काम करना ही सबसे जरूरी है. जहां तक संगठन को राजनीतिक पार्टी का दर्जा देने की बात है, तो मेरा मानना है कि चुनावी राजनीति में जाने से कोई खास फायदा नहीं होता, असली मकसद जनता के लिए काम करना और उनके हक की लड़ाई लड़ना होना चाहिए.
