नयी दिल्ली, 23 नवंबर। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज कहा कि देश में पुराने वाहनों को समाप्त करने के उद्देश्य से जो राष्ट्रीय नीति बनायी गयी है उससे न:न सिर्फ सड़कें साफ और सुरक्षित होंगी बल्कि वायु प्रदूषण में भी कमी आयेगी और नये रोजगार के साथ ही अर्थव्यवस्था में भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की भागीदारी बढ़ेगी।
श्री गडकरी ने सरकार द्वारा स्वीकृत ईएलवी स्क्रैपिंग एवं रिसाईक्लिंग यूनिट, मारुति सुज़ुकी तोयोत्सु इंडिया प्राईवेट लिमिटेड (एमएसटीआई) का आज नोएडा में उद्घाटन करने के अवसर कहा कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग अभी 7.5 लाख करोड़ रुपये का है जिसके अगले पांच वर्षाें में बढ़कर 15 लाख करोड़ रुपये के होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग होने से नये वाहनों की मांग में करीब 12 फीसदी तक की बढोतरी हो सकती है और इससे देश में रोजगार के अवसर भी बढ़ेगें।
उन्होंने कहा कि एक पुराने वाहन से जितना प्रदूषण फैलता है उतना 15 नये वाहनों से प्रदूषण होता है। इस लिहाज से भी स्क्रैपिंग किये जाने से वायु प्रदूषण में भी कमी आयेगी। उन्होंने कहा कि पहले इस तरह की वाहन स्क्रैपिंग यूनिट अमेरिका, ब्राजील और जर्मनी जैसे देशों में थे लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत अब मात्र 40 करोड़ रुपये की लागत से इस तरह की इकाई लगायी जा रही है। उन्होंने कहा कि पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग से न:न सिर्फ देश में कई महत्वपूर्ण पदार्थाें के आयात में कमी आयेगी बल्कि आयात बिल भी कम होगा और पुराने वाहनों के अवशेष से उन पदार्थाें का निकालने से देश में नये रोजगार सृजित होंगे।
उन्होंने देश के हर जिले में इस तरह के दो से तीन वाहन स्क्रैपिंग इकाई लगाये जानेे की आवश्यकता बताते हुये ऑटोमोबाइल कंपनियों से पुराने वाहन मालिकों को नये वाहन खरीदने पर कुछ छूट भी देने की अपील की। उन्होंने कहा कि वाहन स्क्रैपिंग से ऑटोमोबाइल उद्योग की लागत में न:न सिर्फ 30 से 50 फीसदी तक की कमी आयेगी बल्कि भारतीय वाहन वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी भी होंगें जिससे निर्यात में बढोतरी होगी। अभी तीन लाख करोड़ रुपये मूल्य के वाहनों का निर्यात किया जा रहा है। भारतीय दोपहिया वाहन कंपनियां दुनिया भर में वाहन निर्यात करती है और दुनिया के सबसे बड़े निर्यातक भी है।
इस अवसर पर भारत में जापान के एम्बेसडर एक्सट्राऑर्डिनरी एवं प्लेनिपोटेंशियरी सतोषी सुज़ुकी भी मौजूद थे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा दिल्ली और उत्तर प्रदेश सरकार के उच्चाधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद थे।
चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर कदम बढ़ाते हुए एंड-ऑफ-लाईफ वाहनों (ईएलवी) के नियोजित, पारदर्शी एवं पर्यावरण के लिए मित्रवत विखंडन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, मारुति सुज़ुकी और टोयोटा त्सुशो ग्रुप ने एमएसटीआई की स्थापना के लिए हाथ मिलाए हैं। कंपनी की इस इकाई में प्रतिवर्ष 24 हजार से ज्यादा ईएलवी स्क्रैप कर रिसाईकल कर सकती है। 44 करोड़ के निवेश के साथ निर्मित इस सुविधा में आधुनिक व टेक्नॉलॉजी की दृष्टि से उन्नत मशीनों द्वारा वैज्ञानिक तरीके से ईएलवी को विखंडित और स्क्रैप किया जा सकता है। आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य के अनुरूप, इस सुविधा में इस्तेमाल होने वाले सभी उपकरणों को भारत में बनाया गया है।
एमएसटीआई में विश्व प्रमाणित क्वालिटी एवं पर्यावरण के मानकों का पालन किया जाता है। इनमें संपूर्ण सॉलिड व लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट शामिल है, जिसमें ईएलवी से लिक्विड व गैसों का शून्य उत्सर्जन सुनिश्चित किया जाता है। यहां स्क्रैप होने वाले वाहनों के मालिकों को इसका प्रमाणपत्र भी दिया जाता है जिससे वह नये वाहन खरीदने पर मिलने वाले लाभों का उठा सकता है।
एमएसटीआई के अध्यक्ष एवं मारूति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी केनिची आयुकावा ने श्री गडकरी को देश में स्वच्छ, हरे-भरे व सुरक्षित मोबिलिटी परिवेश के अग्रदूत बताते हुये कहा कि मारूति सुज़ुकी में हम संधानों के प्रभावशाली उपयोग व संरक्षण द्वारा मूल्य का निर्माण करने में यकीन करते हैं। हमारी व्यवसायिक प्रक्रियाएं और उत्पाद कम, अल्प, हल्के, स्वच्छ व छोटे के सिद्धांतों पर आधारित हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अभी तक कार की उपयोगिता समाप्त हो जाने के बाद उसके निस्तारण के लिए कोई भी वैज्ञानिक और स्वच्छ तरीका मौजूद नहीं था। इस कमी को पूरा करने के लिए एमएसटीआई वैश्विक प्रक्रिया पद्धति का इस्तेमाल करता है। यह केवल एक शुरुआत है। हमारे साझेदारों के साथ हम भारत में इस तरह के और ज्यादा आधुनिक ईएलवी स्क्रैप एवं रिसाईकल सेंटर खोलने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’