कोरबा :– गरीबों की थाली मे प्रोटीन का सबसे सस्ता सहारा बनने वाला चना जिले में सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। जिले के वेयरहाउस गोदाम में पिछले एक माह से चना स्टॉक खत्म होने के कारण सार्वजनिक वितरण प्रणाली ( पीडीएस) के तहत मिलने वाला चना लाखों हितग्राहियों तक नहीं पहुंच पा रहा है।हालात इतने खराब है कि कई परिवारों को जून माह का चना भी आज तक नहीं मिल सका है, जबकि जुलाई भी समाप्ति की ओर है।
जिले के 325442 (तीन लाख पच्चीस हजार चार सौ बयालीस ) राशन कार्ड धारी परिवार इस अव्यवस्था का खामियाजा भुगत रहे हैं। शहरी क्षेत्र की 138 और ग्रामीण क्षेत्र की 418 शासकीय उचित मूल्य दुकानों में चना वितरण ठप होने से हितग्राही रोजाना दुकानों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन हर बार उन्हें केवल एक ही जवाब मिल रहा है –स्टाक नहीं आया है।
बारिश के मौसम में सब्जियों के दाम पहले ही आम आदमी की पहुंच से बाहर हो रहे हैं। ऐसे में गरीब परिवारों के लिए चना ही पोषण और प्रोटीन का प्रमुख विकल्प था। चना नहीं मिलने से उन्हें बाजार में मांगी सब्जियां खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। इससे गरीब परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।
जानकारी अनुसार जिले में 58057 अंत्योदय, 1604 निराश्रित, 264466 प्राथमिकता, तथा 1315 अन्य पात्र राशनकार्ड धारी परिवार है। राशन की योजना के तहत प्रति के पत्र परिवार को हर मां₹5 प्रति किलो की दर से 2 किलोग्राम चना दिया जाना है लेकिन डेढ़ माह से यह व्यवस्था धराशाई नजर आ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है की यदि समय पर भंडारण और परिवहन की व्यवस्था की जाती तो गरीबों को इस तरह परेशान नहीं होना पड़ता। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब अन्य राशन सामग्री नियमित रूप से दुकानों तक पहुंच रही है तो केवल चना की आपूर्ति ही क्यों बाधित है?
जनता पूछ रही है—-
क्या गरीबों के हिस्से का चना कागजों में बट रहा है?
वेयरहाउस खाली होने तक जिम्मेदार अधिकारी आखिर करते क्या रहे?
किसकी लापरवाही से लाखों परिवारों की थाली से गायब हुआ चना?
गरीबों का हक निकल रहा सिस्टम डेढ़ माह से चना गायब 325442 परिवार परेशान
