नई दिल्ली:- सुप्रीम कोर्ट में जाति जनगणना से जुड़ी याचिका दाखिल हुई थी। तब सीजेआई ने याचिका की भाषा पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था, ‘इस पिटीशन में जिस भाषा का इस्तेमाल हुआ है, उसे आपने कहां से सीखा है? ये बदतमीजी की भाषा कहां से लेकर आते हैं आप लोग? कैसे याचिका लिखते हैं आप
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत गलत याचिकाओं को लेकर कई बार सुप्रीम कोर्ट में नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। यही सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा। बेंच के सामने पेश हुई एक पिटीशन देखकर CJI ने याचिकाकर्ता को जमकर फटकार लगा दी। उन्होंने याचिका लिखने के तरीके पर भी सवाल उठाए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में एंट्री बैन करने की चेतावनी भी दे दी। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
सोमवार को पिनाकपानी मोहंती नाम के एक याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। सीजेआई ने सवाल उठाए, ‘आपने पहले भी ऐसी ही याचिका दाखिल की थी?’ इसपर मोहंती ने कहा, ‘इस बार अलग है। मैंने थोड़ा सा…।’
नाराज हुए CJI सूर्यकांत
याचिकाकर्ता की तरफ से जवाब मिलने के बाद सीजेआई ने फिर सवाल किया कि इसे ‘किसने ड्राफ्ट किया है?’ जवाब में मोहंती ने ‘मुखर्जी सर’ का नाम लिया। इसपर सीजेआई ने चेतावनी जारी कर दी। उन्होंने याचिकाकर्ता से कहा, ‘एंट्री बैन करवा देंगे तुम्हारा सुप्रीम कोर्ट में अब। पहले भी यही याचिका खारिज कर चुके हैं।’
उन्होंने कहा, ‘हमें लगता है कि याचिकाकर्ता मशहूर होने के लिए इस तरह के काम करते हैं। इन तथ्यों से जुड़े मामलों का फैसला अदालत या न्यायिक स्तर पर नहीं किया जा सकता
पहले भी जता चुके नाराजगी
10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में जाति जनगणना से जुड़ी याचिका दाखिल हुई थी। तब सीजेआई ने याचिका की भाषा पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था, ‘इस पिटीशन में जिस भाषा का इस्तेमाल हुआ है, उसे आपने कहां से सीखा है? ये बदतमीजी की भाषा कहां से लेकर आते हैं आप लोग? कैसे याचिका लिखते हैं आप लोग।’
शुक्रवार को सीजेआई ने AI के इस्तेमाल को लेकर AOR यानी एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड को भी हिदायत दी थी। उन्होंने AOR को लेकर कहा था कि वे न केवल बार के सदस्य हैं बल्कि न्यायालय के औपचारिक ‘अधिकारी’ भी हैं। उनपर न्यायपालिका की बड़ी जिम्मेदारी है, जिसपर काफी भरोसा किया जाता है। उन्होंने AOR को चेताया कि काम AI की मदद से या आउटसोर्स करने के बजाए खुद ही करें।
सीजेआई ने कहा, ‘फाइलिंग को एक नियमित प्रक्रिया न समझें। प्रत्येक ब्रीफ को ध्यानपूर्वक पढ़ें।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एओआर की भूमिका एक ‘महत्वपूर्ण मील का पत्थर’ है जो वादियों और सुप्रीम कोर्ट के बीच प्राथमिक जिम्मेदारी बिंदु होने का भार उठाती है। कानूनी प्रक्रिया के उच्चतम मानक सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए सीजेआई ने कहा कि अधिवक्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि याचिकाएं ठीक से तैयार की गई हों, तथ्यों का सावधानीपूर्वक सत्यापन किया गया हो और कानूनी आधार ठोस बने रहें।
