नई दिल्ली:- धनतेरस का त्योहार आते ही लोगों के मन में सोना-चांदी खरीदने, नए बर्तन लाने और भगवान धन्वंतरि की पूजा करने का विचार आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पर्व का संबंध केवल धन और खरीदारी से नहीं, बल्कि भगवान शिव और माता लक्ष्मी से जुड़ी समुद्र मंथन की कथा से भी है?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव ने हलाहल विष धारण किया था, भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे और माता लक्ष्मी ने भी समुद्र से अवतार लिया था। आइए जानते हैं धनतेरस और इन तीनों देवी-देवताओं के बीच क्या संबंध है।
समुद्र मंथन से शुरू होती है धनतेरस की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया था। इस मंथन से कई दिव्य वस्तुओं और रत्नों की प्राप्ति हुई। इसी दौरान हलाहल विष, माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के प्रसंग आते हैं। यही वजह है कि समुद्र मंथन की कथा को धनतेरस के धार्मिक महत्व से जोड़कर देखा जाता है।
भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए धारण किया विष
समुद्र मंथन के समय सबसे पहले हलाहल नामक विष निकला। उसकी तीव्रता से सृष्टि पर संकट उत्पन्न होने लगा। तब भगवान शिव ने लोककल्याण के लिए उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया और उन्हें नीलकंठ नाम मिला। यह प्रसंग त्याग, करुणा और दूसरों के कल्याण की भावना का प्रतीक माना जाता है।
अमृत कलश लेकर प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि
समुद्र मंथन की कथा में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को उनके प्राकट्य के कारण इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी कहा जाता है। इस दिन उनकी पूजा करके लोग अच्छे स्वास्थ्य और आरोग्य की कामना करते हैं।
समुद्र से हुआ था माता लक्ष्मी का प्राकट्य
समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी भी प्रकट हुई थीं। उन्हें धन, वैभव, सौभाग्य और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। धनतेरस पर माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा इसी धार्मिक भावना से जुड़ी है। इस दिन भगवान कुबेर का पूजन भी किया जाता है, जिन्हें धन का देवता माना गया है।
धनतेरस की कथा देती है तीन महत्वपूर्ण संदेश
धनतेरस से जुड़ी इन पौराणिक मान्यताओं में जीवन के तीन खास संदेश मिलते हैं। भगवान शिव का विषपान त्याग और परोपकार की प्रेरणा देता है, भगवान धन्वंतरि का अमृत कलश स्वास्थ्य के महत्व को बताता है और माता लक्ष्मी का प्राकट्य समृद्धि का प्रतीक है। इसलिए धनतेरस केवल धन अर्जित करने का पर्व नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, सुख-शांति और खुशहाल जीवन की कामना करने का अवसर भी है।
