नई दिल्ली: – महिला आरक्षण से बदलेगा देश का सियासी नक्शा! लोकसभा 815 सीटें, UP-बिहार सबसे आगेकेंद्र सरकार ने संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन विधेयक पेश कर दिया है, जिससे देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 815 हो जाएंगी। इनमें 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार का कहना है कि इससे किसी राज्य या पुरुष प्रतिनिधित्व को नुकसान नहीं होगा, बल्कि सभी राज्यों की सीटें आनुपातिक रूप से बढ़ेंगी।
सबसे ज्यादा फायदा उत्तर प्रदेश और बिहार को मिलने का अनुमान है। दोनों राज्यों की कुल सीटें मिलाकर करीब 180 तक पहुंच सकती हैं, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में इन राज्यों का प्रभाव और मजबूत होगा। अगर उत्तर प्रदेश की सीटें 120 होती हैं, तो उनमें से 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी।
गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि दक्षिण भारत के राज्यों की सीटों में भी बढ़ोतरी होगी। तमिलनाडु की सीटें 39 से 59, तेलंगाना की 17 से 26 और केरल की 20 से 30 तक हो सकती हैं। अन्य राज्यों में गुजरात 26 से 39, आंध्र प्रदेश 25 से 38, राजस्थान 25 से 38, ओडिशा 21 से 32, छत्तीसगढ़ 11 से 17, हरियाणा 10 से 15, पंजाब 13 से 20 और दिल्ली 7 से 11 सीटों तक पहुंच सकती है।
नई व्यवस्था के तहत बढ़ी हुई कुल सीटों में से एक तिहाई यानी 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। लोकसभा के साथ-साथ राज्य विधानसभाओं में भी यही व्यवस्था लागू की जाएगी। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान रहेगा।
सरकार के मुताबिक यह बदलाव 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लागू होगा और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले इसे लागू करने की तैयारी है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि इससे उत्तर भारत के राज्यों को ज्यादा फायदा होगा, जबकि दक्षिण भारत का प्रभाव कम हो सकता है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी।
