असम की सियासत में परिसीमन के बाद होने वाले पहले और सबसे ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को यह साफ कर दिया कि एनडीए (NDA) के कुनबे में ऑल इज वेल है। सीटों के बंटवारे का पेचीदा काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। मुख्यमंत्री ने भरोसे के साथ कहा कि सहयोगियों के बीच कौन कहां से लड़ेगा, इसे लेकर कोई संशय नहीं है और अब बस दिल्ली की मुहर का इंतजार है।
मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व जल्द ही संभावित उम्मीदवारों की सूची लेकर दिल्ली रवाना होगा। वहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ अंतिम दौर की चर्चा होगी। माना जा रहा है कि होली के आसपास भाजपा अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर सकती है। इस बार गठबंधन में भाजपा के साथ असम गण परिषद (AGP), यूपीपीएल (UPPL), बीपीएफ (BPF) और राभा हासोंग जैसे क्षेत्रीय दल एक मजबूत दीवार बनकर चुनावी मैदान में उतर रहे हैं।
परिसीमन के बाद पहला विधानसभा चुनाव
2023 में हुए निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद यह राज्य का पहला विधानसभा चुनाव है। इस परिसीमन ने असम के चुनावी भूगोल को पूरी तरह बदल दिया है। कई सीटों की सीमाएं बदली हैं तो कुछ के नाम और आरक्षित श्रेणी (SC/ST) में भी बदलाव हुआ है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को भरोसा है कि परिसीमन के बाद बदले समीकरण स्वदेशी लोगों के हितों की रक्षा करेंगे और एनडीए को बहुमत के करीब ले जाएंगे।
विपक्ष की चुनौतियां और आंकड़ों का खेल
वर्तमान में 126 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 64 विधायक हैं, जबकि सहयोगियों को मिलाकर यह संख्या 83 तक पहुंचती है। दूसरी ओर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा का आज भाजपा में शामिल होना विपक्ष के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका माना जा रहा है, जहां कांग्रेस के पास 26 और एआईयूडीएफ के पास 15 विधायक हैं। वहीं, भाजपा की नजर इस बार अपनी सीटों की संख्या को 70 के पार ले जाने पर है।
मार्च-अप्रैल में चुनाव होने की संभावना
मार्च-अप्रैल में होने वाले इन चुनावों के लिए एनडीए ने अपनी तैयारी सीट शेयरिंग के साथ पूरी कर ली है। अब देखना होगा कि परिसीमन के बाद जनता किस पॉलिटिकल मैप को अपनी स्वीकृति देती है।
