छत्तीसगढ़:– सरकार ने RTE के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए चयन सूची जारी कर दी. ऑनलाइन लॉटरी से तैयार यह सूची महानदी भवन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और शिक्षा मंत्री की मौजूदगी में जारी की गई.
छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने पहले से निर्धारित समय-सारणी के अनुसार RTE के तहत प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदनों की चयन सूची जारी कर दी. ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से चयन सूची मंत्रालय महानदी भवन के मुख्यमंत्री कक्ष से जारी की गई. यह प्रक्रिया मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की मौजूदगी में पूरी कराई गई. इस मौके पर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी सहित अन्य मौजूद रहें
आवेदन एवं चयन की स्थिति
इस साल प्रदेश में कुल 21 हजार 975 सीटों के विरुद्ध 38 हजार 439 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 27 हजार 203 आवेदन पात्र और 11 हज़ार 236 आवेदन अपात्र पाए गए. पात्र आवेदनों में से 14 हजार 403 विद्यार्थियों का चयन ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से किया गया है. यह चयन संख्या मुख्यमंत्री DAV स्कूलों की RTE सीटों को छोड़कर है. इन विद्यालयों में जिला स्तर पर ऑफलाइन लॉटरी आयोजित कर अलग से जानकारी RTE पोर्टल में अपडेट की जाएगी.
जिलेवार चयनित स्टूडेंट्स की जानकारी
जिलेवार चयनित विद्यार्थियों की स्थिति इस प्रकार है. रायपुर में 2606, बिलासपुर में 1509, दुर्ग में 1059, कोरबा में 534, राजनांदगांव में 480, बलौदाबाजार-भाटापारा में 457, जांजगीर-चांपा में 500, मुंगेली में 702, कवर्धा में 367, धमतरी में 354, बलरामपुर में 798, रायगढ़ में 544, बेमेतरा में 315, जशपुर में 543, सक्ती में 347, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 258, महासमुंद में 244, कांकेर में 471, बालोद में 353, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 195, सूरजपुर में 427, सरगुजा में 273, गरियाबंद में 193, कोरिया में 179, बस्तर में 135, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 206, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 112, कोंडागांव में 101, नारायणपुर में 35, मोहला- मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 48, दंतेवाड़ा में 35, सुकमा में 9 और बीजापुर में 14 स्टूडेंट्स का चयन किया गया है.
सरकार का तर्क, इस वजह से रह गईं सीटें खाली
कुछ निजी स्कूलों में सीटें पूरी तरह से नहीं भर पाईं. सरकार के मुताबिक इसका मुख्य कारण कई विद्यालयों को आवेदकों द्वारा प्राथमिकता नहीं दिया जाना है, जिससे उनके लिए आवेदन प्राप्त नहीं होते. साथ ही जिन विद्यालयों को द्वितीय या तृतीय प्राथमिकता में रखा जाता है, वहां भी सीटें रिक्त रह जाती हैं, क्योंकि आवेदकों को उनकी प्रथम प्राथमिकता वाले विद्यालय में प्रवेश मिल जाता है. परिणामस्वरूप ऐसे विद्यालय, जो किसी भी आवेदक की प्राथमिकता में नहीं आते, उनकी सीटें खाली रह जाती हैं.
