नई दिल्ली:– भारत के LPG इम्पोर्ट में भी गिरावट आई है और घरेलू उत्पादन में भी पिछले महीने के मुकाबले लगभग 10 परसेंट तक की गिरावट आई है. यह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का ही नतीजा है.
India: भारत की लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सप्लाई अप्रैल के महीने में दबाव में है. फरवरी के मुकाबले इम्पोर्ट लगभग आधा रह गया है. इतना ही नहीं, पिछले महीने के मुकाबले घरेलू उत्पादन में भी लगभग 10 परसेंट तक की गिरावट आई है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का ही असर है कि हालात मुश्किल होते जा रहे हैं. एनर्जी शिपमेंट में रुकावट आ रही है और अब सप्लाई भी कम होती जा रही है.
कम होता जा रहा LPG का आयात
1 अप्रैल से 14 अप्रैल के बीच भारत ने हर दिन सिर्फ 37000 टन LPG इम्पोर्ट की, जो फरवरी में रोजाना 73000 टन थी. इस बीच, अमेरिका भले ही सबसे बड़े सप्लायर के तौर पर सामने आया है, लेकिन भारत अभी भी अपने आधे से ज्यादा इम्पोर्ट के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है.
चूंकि दुनिया की ज्यादातर LPG लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट्स के तहत बुक होती है और तुरंत खरीद के लिए बहुत ही कम हिस्सा उपलब्ध होता है इसलिए भारत के लिए सप्लाई को तेजी से बढ़ाना मुश्किल हो रहा है. इधर मांग बढ़ती जा रही है. अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की खबरों के बीच भी इस संकट को कम करने में अभी तक कोई खास मदद नहीं मिली है.
कब तक बहाल होगी सप्लाई?
जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि भारत अपनी LPG सप्लाई के लिए पश्चिमी एशिया पर बहुत निर्भर है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी और अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर्स पर हमलों की वजह से इस सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है.
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ”प्रभावित सप्लायर्स से मिली जानकारी के आधार पर सप्लाई बहाल होने में कम से कम तीन साल और शायद उससे भी ज्यादा समय लग सकता है.” अधिकारी ने भारत के बढ़ते इंपोर्ट जोखिमों और लागत के दबाव की ओर इशारा किया. भारत की LPG इंपोर्ट पर निर्भरता अभी भी बहुत ज्यादा है. इसकी कुल खपत का लगभग 60 परसेंट हिस्सा इम्पोर्ट से ही पूरा होता है.
फरवरी में जंग शुरू होने से पहले इस सप्लाई का लगभग 90 परसेंट हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही आता था. 24 मार्च तक खाड़ी देशों से होने वाले इंपोर्ट का हिस्सा घटकर 55 परसेंट रह गया, जो सप्लाई में आई रुकावट और सप्लाई के स्रोतों में किए गए बदलाव (विविधीकरण) — दोनों की ओर इशारा करता है.
