छत्तीसगढ़:– सबसे चर्चित घोटाला केस में ACB/EOW ने 2000 पन्नों का चालान कोर्ट में पेश कर दिया है. इसमें कुल 4 आरोपियों के खिलाफ पत्र दाखिल किया गया है. बताया जा रहा है कि इसमें लगभग 550 करोड़ रुपए का नुकसान का अनुमान है.
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड से जुड़े बहुचर्चित घोटाला मामले में ACB/EOW ने गुरुवार को पूरक चालान न्यायालय में पेश कर दिया है. लगभग 2000 पन्नों के इस चालान को ACB/EOW के विशेष न्यायाधीश नीरज शर्मा की अदालत में प्रस्तुत किया गया. इस पूरक चालान में कुल 4 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है. सभी आरोपी रायपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं. इस पूरे मामले में शासन को करीब 550 करोड़ रुपये की क्षति पहुंचाने का अनुमान है. जांच एजेंसी के मुताबिक, योजनाबद्ध तरीके से पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया है.
एसीबी/ईओडब्ल्यू ने अभिषेक कौशल (डायरेक्टर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि.), राकेश जैन (प्रोप्राइटर, श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर), प्रिंस कोचर (लायजनर) और कुंजल शर्मा (मार्केटिंग हेड, डायसिस इंडिया प्रा.लि.) के खिलाफ पूरक चालान पेश किया है. वहीं प्रिंस कोचर (लायजनर) को पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड शशांक चौपड़ा का रिश्तेदार बताया जा रहा है.
जांच में बड़ा खुलासा
जांच में खुलासा हुआ है कि ‘हमर लैब योजना’ के तहत सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच के लिए मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स की खरीद में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की गई. निविदा प्रक्रिया में शामिल फर्मों ने आपसी मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपनी पात्रता साबित की और टेंडर हासिल किया. तीनों प्रमुख फर्मों मोक्षित कॉर्पोरेशन, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने टेंडर में समान पैटर्न में उत्पाद विवरण और दरें भरीं. जांच में यह भी सामने आया कि डायसिस कंपनी द्वारा तय एमआरपी से कहीं अधिक दरें भेजी गईं, जिससे CGMSC ने अधिक कीमतों पर खरीद को मंजूरी दी.
करोड़ों का नुकसान
आरोप है कि रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति वास्तविक कीमत से तीन गुना तक अधिक दर पर की गई, जिससे शासन को लगभग 550 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई. इससे पहले इस मामले में 6 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है. इस कार्रवाई के बाद अब तक कुल 10 आरोपियों के विरुद्ध अदालत में चालान प्रस्तुत किया जा चुका है. ACB/EOW का कहना है कि CGMSC से जुड़े इस बहुचर्चित घोटाले में जांच अभी जारी है और आगे भी साक्ष्यों के आधार पर अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
