नई दिल्ली:– कच्चे तेल की कीमत में हाल में काफी तेजी आई है। लेकिन कई देशों की सरकारों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी से परहेज किया है। इस बीच आईएमएफ ने सरकारों को चेतावनी दी है कि वे भारी सब्सिडी या कीमतों पर कैप लगाकर जनता को इस बढ़ोत्तरी से न बचाएं।
इंटरनैशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से बढ़ रही तेल की कीमतों को लेकर सरकारों को एक कड़वी सलाह दी है। IMF ने कहा है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का असर सीधे जनता तक पहुंचने दें और उन्हें ‘महंगाई का दर्द’ महसूस करने दें। IMF ने सरकारों को चेतावनी दी है कि वे भारी सब्सिडी या कीमतों पर कैप लगाकर जनता को इस बढ़ोत्तरी से न बचाएं।
ET के मुताबिक, IMF का कहना है कि अगर तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं, तो दुनिया मंदी की चपेट में आ सकती है। IMF को डर है कि अगर सरकारें सब्सिडी देकर घरेलू कीमतों को जबरदस्ती कम रखेंगी, तो लोग तेल का इस्तेमाल कम नहीं करेंगे। अगर मांग कम नहीं हुई, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। इससे सरकारों पर सब्सिडी का बोझ और बढ़ेगा और यह कभी न खत्म होने वाला एक बुरा चक्र बन जाएगा।
ईरान के साथ जारी तनाव के बावजूद, भारत ने पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम ऊपर-नीचे होते रहे, लेकिन भारत ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर और पब्लिक सेक्टर की तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) के जरिए घाटा सहकर कीमतों को बढ़ने नहीं दिया। ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल की करीब पहुंच गई थी। हालांकि हाल में यह 100 डॉलर से नीचे आई है।
ईरान युद्ध के बीच कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई है
IMF की सलाह, जनता को सहने दें तेल की महंगाई का दर्द
सरकार ने सब्सिडी दी तो तेल का इस्तेमाल कम नहीं करेंगे लोग
सब्सिडी या कैप लगाकर जनता को इस बढ़ोत्तरी से न बचाएं
एलपीजी के मामले में सरकार का रुख मिलाजुला रहा है। घरों में यूज होने वाले 14.2 किलो के सिलेंडर की कीमत में मामूली इजाफा किया गया है जबकि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुताबिक बढ़ोतरी की गई है। भारत अपनी खपत की 60 फीसदी एलपीजी विदेशों से मंगाती है। इसमें से अधिकांश खाड़ी देशों से आती है। ईरान युद्ध के बाद भारत ने इसे डाइवर्सिफाई किया है।
