छत्तीसगढ़:- आरटीई को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. वहीं प्रदेश के अंदर लगभग 5000 निजी स्कूल बंद रहे. स्कूल बंद होने से लगभग 15 हजार छात्रों के भविष्य पर संकट मंडराने लगा है.
छत्तीसगढ़ में RTE की प्रतिपूर्ति की राशि सरकारी स्कूलों पर आने वाले खर्च के बराबर करने की मांग को लेकर प्रदेश के निजी स्कूलों पर ताला लटका मिला है. वहीं प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन का कहना है कि प्रदेश में आज करीब 5000 स्कूल बंद रहे. इससे पहले शुक्रवार को प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट ने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया था. आरटीई पर सरकार की सख्ती के बाद से प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट आंदोलनरत है. आंदोलन की अगली कड़ी में प्रदेश के करीब 8000 प्राइवेट स्कूल शिक्षा मंत्री को चिट्ठी लिखकर प्रतिपूर्ति की राशि बढ़ाने की मांग करेंगे.
प्रदेश में RTE को लेकर सरकार ने पहली लिस्ट जारी कर दी है. करीब 14,000 बच्चों को इसके तहत प्राइवेट स्कूलों में दाखिला दिया जाएगा. लिस्ट में शामिल बच्चों के अभिभावक सरकार और निजी स्कूलों की लड़ाई में परेशान हैं. उन्हें इस बात की चिंता सता रही है कि लिस्ट जारी होने के बाद उनके बच्चों का दाखिला स्कूलों में होगा या नहीं.
राशि बढ़ाने की मांग पर अड़े
प्रदेश की साय सरकार आरटीई के तहत दाखिला लेने वाले प्रत्येक विद्यार्थी के बदले में ₹7000 फीस देती है, जबकि स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन का कहना है कि आरटीई के प्रावधानों के तहत यह राशि ₹22,000 होनी चाहिए. एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता का कहना है कि आरटीई में सरकारी स्कूलों में प्रति छात्र आने वाले खर्च के बराबर प्राइवेट स्कूलों को प्रतिपूर्ति देने का नियम है. उनका कहना है कि यह राशि मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा.
RTE को लेकर सरकार सख्त
वहीं दूसरी तरफ सरकार ने आदेश जारी कर रखा है कि RTE को लेकर जिन स्कूलों ने गरीब बच्चों को एडमिशन देने में टालमटोल की, उनकी मान्यता खतरे में पड़ सकती है. वहीं, स्कूल अभिभावक एवं विद्यार्थी कल्याण संघ के सचिव योगेंद्र ओझा का कहना है कि हर साल प्राइवेट स्कूल करीब 5 हजार करोड़ रुपये फीस और अन्य मदों में अभिभावकों से वसूलते हैं. वह सवाल उठाते हैं कि बच्चे इतनी महंगी फीस देने के बाद भी ट्यूशन क्यों पढ़ते हैं? एक-एक क्लास में 60-60 बच्चे पढ़ाए जाते हैं, फिर इतनी फीस क्यों? जबकि स्कूल खोलने की पहली शर्त सेवा भाव है. ओझा का कहना है कि निजी स्कूलों की मांग गलत है और वे सरकार को ब्लैकमेल कर रहे हैं.
