नई दिल्ली:– श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनने की दौड़ बेहद दिलचस्प हो गई है। इस प्रतिष्ठित पद के लिए आवेदन करने वालों की संख्या 5 हजार के पार पहुंच गई है। खास बात यह है कि दावेदारों में सेवानिवृत्त IAS, IPS, IRS अधिकारियों के साथ-साथ भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी और प्रशासन व कॉर्पोरेट प्रबंधन का लंबा अनुभव रखने वाले कई पेशेवर भी शामिल हैं। अब तीन सदस्यीय सर्च कमेटी इन आवेदनों की जांच कर योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करेगी, जिसके बाद अंतिम फैसला श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट करेगा।
5 हजार से ज्यादा आवेदन
राम मंदिर के CEO पद के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 18 जुलाई शाम 4 बजे थी। तय समय सीमा तक ट्रस्ट को 5,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। सूत्रों के अनुसार इतनी बड़ी संख्या में आवेदन आने से यह चयन प्रक्रिया अब तक की सबसे चर्चित प्रशासनिक नियुक्तियों में शामिल हो गई है। बड़ी संख्या में पूर्व नौकरशाहों, सैन्य अधिकारियों और अनुभवी प्रोफेशनल्स ने इस जिम्मेदारी के लिए अपनी दावेदारी पेश की है।
श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट लेगा अंतिम निर्णय
आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब ट्रस्ट सभी आवेदनों की तय मानकों के आधार पर जांच करेगा। इसके बाद पात्र उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग और शॉर्टलिस्टिंग की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक विशेषज्ञ समिति तीन से अधिक नामों की सिफारिश नहीं करेगी। अंतिम चयन और नियुक्ति का अधिकार श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास ही रहेगा।
सर्च कमेटी करेगा उम्मीदवारों का चयन
6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में CEO चयन के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया गया था। इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और श्री साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हवारे शामिल हैं। यही समिति सभी आवेदनों की समीक्षा कर योग्य उम्मीदवारों की सूची ट्रस्ट को सौंपेगी।
नए CEO पर होगी बड़ी जिम्मेदारी
राम मंदिर के नए CEO के कंधों पर सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी ही नहीं होगी, बल्कि मंदिर की वित्तीय पारदर्शिता, दान व्यवस्था की निगरानी, संस्थागत जवाबदेही और दैनिक संचालन को और मजबूत बनाने की जिम्मेदारी भी होगी। यह नियुक्ति ऐसे समय हो रही है जब हाल ही में मंदिर में कथित दान चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट अपनी प्रशासनिक व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रहा है।
यह थी आवेदन के लिए पात्रता
ट्रस्ट द्वारा जारी पात्रता मानदंडों के अनुसार सेवारत सरकारी अधिकारी जो अपने कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों में हैं, सेवानिवृत्त अधिकारी और योग्य निजी क्षेत्र के पेशेवर इस पद के लिए आवेदन कर सकते थे। ट्रस्ट ऐसे व्यक्ति की तलाश में है जिसे बड़े संस्थानों के संचालन और प्रशासन का अनुभव हो।
ईमानदारी का होगा टेस्ट
सूत्रों के मुताबिक, चयन प्रक्रिया केवल शैक्षणिक योग्यता या प्रशासनिक अनुभव तक सीमित नहीं रहेगी। उम्मीदवारों के सेवा रिकॉर्ड, ईमानदारी, नेतृत्व क्षमता, अनुशासनात्मक इतिहास, वित्तीय पारदर्शिता, कार्य निष्पादन और बड़े संस्थानों के संचालन के अनुभव का भी मूल्यांकन किया जाएगा। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि उम्मीदवार धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील संस्थान की जिम्मेदारी निभाने के लिए कितना उपयुक्त है।
अब ट्रस्ट के अंतिम फैसले पर टिकी निगाहें
5 हजार से अधिक आवेदनों के बीच अब सभी की नजरें सर्च कमेटी की स्क्रीनिंग प्रक्रिया और ट्रस्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। आखिर राम मंदिर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थानों में से एक का पहला CEO कौन बनेगा, इसका फैसला आने वाले दिनों में होगा।
