कोलकाता :– आज देश का पहला अनोखा म्यूजियम ‘म्यूजियम ऑफ वर्ड्स’, जिसे शब्दालोक भी कहा जाता है, वह आम लोगों जनता के लिए खुलने जा रहा है। इस म्यूजियम ऑफ वर्ड्स में भारत की भाषाओं का उद्गम, विकास और उनके प्रभाव को प्रदर्शित किया जाता है। उद्भव, विकास और उनके सभ्यतागत प्रभाव वैज्ञानिक ढंग से प्रदर्शित होंगे।
नेशनल लाइब्रेरी कॉम्प्लेक्स में मौजूद ऐतिहासिक बेल्वेडियर हाउस अब सिर्फ अतीत की एक निशानी नहीं रहेगा। यह ‘शब्दलोक’ के रूप में भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के जीवंत प्रमाण के तौर पर उभरेगा। यह म्यूजियम न सिर्फ देश में, बल्कि दुनिया भर में एक अनूठी पहल है, जहां शब्दों, लिपियों, ध्वनियों और अभिव्यक्तियों की बहुआयामी दुनिया का अनुभव एक ही छत के नीचे किया जा सकेगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे उद्घाटन
‘म्यूजियम ऑफ वर्ड्स’ में 11वीं सदी के ताम्रपत्रों से लेकर आधुनिक होलोग्राफिक तकनीक तक की झलकियां देखने को मिलेगी। रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने बंगाल दौरे के दौरान इस संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे।
इसकी सबसे खास बात यह है कि यह भाषा को सिर्फ बातचीत के जरिया के तौर पर नहीं, बल्कि एक जीवंत और गतिशील सांस्कृतिक इकाई के रूप में पेश करेगा। यहां आने वाले लोग यह समझ पाएंगे कि भाषाएं समय के साथ कैसे बदलती हैं, समाज के साथ कैसे विकसित होती हैं और पहचान का आधार कैसे बनती हैं। मौखिक परंपराओं से लेकर पांडुलिपियों और छपी हुई किताबों तक का सफर यहां जीवंत हो उठेगा।
2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी परिकल्पना
आपको जानकारी दें, कि इसकी परिकल्पना 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की समृद्ध बहुभाषी विरासत को संरक्षित रखना है और साथ ही नई पीढ़ी को अपनी पारंपरिक भाषाओं से जोड़कर रखने और अवगत कराना है। यह म्यूजियम ऑफ वर्ड्स सदियों पुरानी मौखिक और लिखित भाषाओं और उनकी विविधताओं को संजोकर रखने का काम करेगा।
इस म्यूजियम ऑफ वर्ड्स को 41 करोड़ की लागत में बनाया गया है। इसके पहले चरण का काम पूरा किया जा चुका है, जिसका कुल खर्च 14 करोड़ रुपए हैं और दूसरे और तीसरे चरण का काम तेजी से चल रहा है।
आज दुनिया की सबसे बड़ी दही यूनिट की नींव रखेंगे अमित शाह
रविवार को अमित शाह हावड़ा के संकराइल फूड पार्क में अमूल के ₹650 करोड़ के मेगा डेयरी प्लांट की आधारशिला रखेंगे। गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन का यह प्रोजेक्ट दुनिया की सबसे बड़ी दही बनाने वाली यूनिट बताई जा रही है।
इस प्लांट में रोजाना 15 लाख लीटर दूध प्रोसेस करके 10 लाख किलोग्राम दही बनाने की क्षमता होगी। यहां लस्सी, पनीर, मक्खन, घी और आइसक्रीम भी बनाई जाएगी। यह प्रोजेक्ट बंगाल के डेयरी सेक्टर को बड़ी रफ्तार देगा, किसानों को बेहतर दाम दिलाएगा और हजारों लोगों के लिए रोजगार के मौके पैदा करेगा।
