कोरबा:_ प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी फर्जी हितग्राहियों के नाम पर राशि जारी किए जाने की शिकायत ने कोरबा जिले में एक बार फिर पंचायतीराज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत तिलकेजा में 48 कथित फर्जी हितग्राहियों के नाम से राशि जारी किए जाने की शिकायत के बाद प्रशासनिक कार्रवाई का मामला सामने आया है। प्रकरण में ग्राम पंचायत सचिव नविता दुबे को निलंबित कर दिया गया है, जबकि विकासखंड समन्वयक देवानंद श्रीवास्तव को जनपद पंचायत में संलग्न किया गया है।
आरटीआई के दस्तावेजों से उठा मामला
बताया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायत जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन के समक्ष पहुंची, जांच के लिए दल गठित किया गया।
जांच दल ने पंचायत सचिव को आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। 13 अगस्त को उपसंचालक पंचायत कार्यालय में आधार कार्ड, बैंक पासबुक, मृत्यु प्रमाण पत्र रजिस्टर सहित अन्य अभिलेख सहित बुलाया गया सरपंच और सचिव दोनों के अनुपस्थित रहे।
नोटिस का जवाब भी नहीं दिया
सचिव नविता दुबे को कारण बताओ सूचना पत्र का निर्धारित अवधि तीन दिन के भीतर, जवाब प्रस्तुत नहीं किया। इसके बाद जांच में सहयोग नहीं करने तथा शासकीय कार्यों में लापरवाही और उदासीनता बरतने के आधार पर उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई।
प्रशासनिक आदेश में उनका कृत्य छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा आचरण नियम, 1998 के प्रावधानों के विपरीत माना गया है।
48 नामों की सच्चाई क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन 48 हितग्राहियों के नाम पर राशि जारी किए जाने की शिकायत हुई है, उनमें कितने वास्तविक हैं और कितने फर्जी? क्या सभी हितग्राहियों के बैंक खातों, आधार विवरण, आवास निर्माण की वास्तविक स्थिति और संबंधित अभिलेखों का भौतिक सत्यापन हुआ है? यदि राशि वास्तव में अपात्र या फर्जी नामों पर जारी हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार अन्य अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी।
तिलकेजा से आगे भी होगी जांच?
प्रधानमंत्री आवास जैसी गरीब और जरूरतमंद परिवारों से सीधे जुड़ी योजना में यदि फर्जीवाड़े की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो यह केवल एक पंचायत तक सीमित मामला नहीं माना जा सकता। अब निगाह जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
क्या जिले की अन्य ग्राम पंचायतों में भी प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों, बैंक खातों, आधार विवरण, मृत्यु प्रमाण पत्र रजिस्टर और जारी की गई राशि का व्यापक परीक्षण कराया जाएगा? क्या पुराने प्रकरणों की भी दोबारा जांच होगी? और यदि कहीं गड़बड़ी मिलती है तो क्या जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों से राशि की वसूली के साथ कठोर कार्रवाई होगी?
तिलकेजा प्रकरण में हुई कार्रवाई ने कम से कम इतना संकेत जरूर दिया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन और हितग्राही चयन में पारदर्शिता की जांच अब और गंभीरता से किए जाने की जरूरत है। अब देखना होगा कि प्रशासन की कार्रवाई एक पंचायत तक सीमित रहती है या पूरे जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के रिकॉर्ड की व्यापक जांच का रास्ता खोलती है।
