लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर हो हल्ला शुरू हो गया है. इस बार ये हल्ला शुरू किया कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने. उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव बैलट पेपर के जरिए कराने की मांग की. तिवारी ने कहा कि ईवीएम मशीन को हैक भी किया जा सकता है इसलिए इस बार का लोकसभा चुनाव बैलट पेपर पर होना चाहिए. कांग्रेस नेता ने कहा कि मुझे ईवीएम को लेकर चुनाव आयोग का जुनून समझ नहीं आता है.
उन्होंने कहा कि EVM भी तो एक मशीन ही है, दूसरे मशीनों की तरह इससे भी छेड़छाड़ किया जा सकता है. इतना ही नहीं, उन्होंने आगे कहा कि जिन देशों में पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से वोटिंग होती थी, वहां अब बैलट पेपर से चुनाव होने लग गए हैं. इसका सिर्फ एक ही कारण है EVM से छेड़छाड़ होना. इसलिए बैलट पेपर से ही चुनाव होने चाहिए.
31 देशों में ईवीएम से वोटिंग कराई जाती है. इनमें 4 देशों में इसका पूर्ण इस्तेमाल होता है यानी हर जगह EVM से ही मतदान होता है. वहीं, 11 देशों में कहीं कहीं इसका (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) इस्तेमाल होता है. पांच देशों में ईवीएम का प्रयोग पायलट बेसिस के तौर पर किया जाता है. वहीं, तीन देशों ने इसका इस्तेमाल बंद कर दिया है जबकि 11 देश जहां EVM का इस्तेमाल पायलट बेसिस पर किया जाता है वहां भी EVM को बंद करने की कोशिश हो रही है.इन 4 देशों में EVM का पूर्ण इस्तेमालभारतब्राजीलभूटानवेनेजुएलाइन देशों में कहीं कहीं पर इस्तेमालबेल्जियमफ्रांसअमेरिकाकनाडामैक्सिकोपेरूजापानअर्जेंटीनाइन तीन देशों में EVM बंदजर्मनीनीदरलैंडपुर्तगाल1982 में पहली बार EVM से मतदान
बता दें कि भारत में पहले बैलट पेपर से वोटिंग होती थी. भारत में सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल केरल (मई 1982) में हुआ था. परूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के 50 मतदान केन्द्रों पर ईवीएम से वोटिंग हुई थी. 1999 के लोकसभा चुनाव में कुछ-कुछ जगहों पर इसका इस्तेमाल किया गया. वहीं, 2004 में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ईवीएम का पूरी तरह से इस्तेमाल होने लगा. EVM के साथ-साथ वोटर-वेरिफाइड पेपर ऑडिट (VVPAT) भी आया. 2010 में चुनाव आयोग ने इसे इंट्रोड्यूस किया गया.
पहली बार इसका इस्तेमाल 2013 में नागालैंड के उपचुनाव में हुआ. चुनाव आयोग ने 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए प्रत्येक मतदान केंद्र पर VVPAT का प्रस्ताव रखा.EVM पर कांग्रेस ने कई बार उठाए सवालयह बार नहीं है, इससे पहले भी कांग्रेस इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर सवाल उठा चुकी है. ताजा मामला है कर्नाटक विधानसभा चुनाव है. पार्टी ने ईवीएम के इस्तेमाल पर नाराजगी जताई थी. कांग्रेस ने 2019 लोकसभा चुनाव भी बैलट पेपर से कराने की मांग कर रही था. EVM को लेकर एक बार भी कांग्रेस का स्टैंड क्लियर नहीं रहा है.
जिस राज्य में वो चुनाव जीत जाती है, उस राज्य की ईवीएम सही सलामत रहती है लेकिन जहां हार नसीब होती तो वह सवाल उठाने लगती है. कांग्रेस से यह विषय कोई नया नहीं है. चुनाव से पहले वो इस तरह का सवाल उठाया करती है.
