नई दिल्ली:– बारिश शुरू होते ही बाजार जामुन के नीले रंग से सज गया है। इस मौसम में जामुन फल की बहार आई हुई है। हाईवे पर सड़कों के किनारे टोकरी में जामुन लेकर बेचने वाले हर कहीं दिखाई दे रहे हैं। वहीं शहरों में ठेलों पर इन दिनों जामुन बिक रहे हैं। अपने औषधीय गुणों के कारण जामुन को दैवीय फल भी माना जाता है।
जामुन का गहरा नीला-काला रंग तुरंत ध्यान आकर्षित करता है। कविताओं में जामुन को प्रेमी का पसंदीदा बताया गया है। आइए जानते हैं जामुन खाने के अद्भुत फायदों के बारे में और मधुमेह नियंत्रण, चमकदार त्वचा और पाचन क्रिया को सुधारने के लिए जामुन और उसकी गुठली के चूर्ण का उपयोग के संबंध में।
छाल पाचन तंत्र को दुरुस्त करने में मदद करती है
जामुन के पेड़ का हर हिस्सा बेहद काम का होता है। इस पौधे के तने की छाल का स्वाद कसैला होता है। जामुन की छाल पाचन तंत्र को दुरुस्त करने में मदद करती है। यह कृमिनाशक (पेट के कीड़े मारने वाली) होती है और आंतों को मजबूती देती है।
इंडियन ब्लैक बेरी से जंबुद्वीप
भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, मलाया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में जामुन के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। जामुन का वैज्ञानिक नाम ‘सायझिजियम क्युमिनी’ (Syzygium cumini) है। ‘मिर्टेसी’ (Myrtaceae) कुल के इस वृक्ष की वृद्धि बहुत तेजी से होती है। बड़े फल वाले पेड़ को ‘रायजामुन’ कहा जाता है।
अंग्रेजी में जामुन को ‘जावा प्लम’ या ‘इंडियन ब्लैक बेरी’ कहते हैं। हिंदी में इसे जामुन या जाम्बुल, संस्कृत में ‘जंबूफलम्’ या ‘महाफल’, तमिल में ‘नावर पळम’ और तेलुगु में ‘नेरेडू’ के नाम से जाना जाता है। प्राचीन भारतीय साहित्य में ‘जंबुद्वीप’ की संकल्पना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है।
कुछ विद्वान जंबु का अर्थ जामुन के वृक्ष बताते हैं
पौराणिक संदर्भों के अनुसार, विश्व की रचना कई द्वीपों में विभाजित है, जिनमें से जंबुद्वीप को केंद्रीय और सबसे महत्वपूर्ण द्वीप माना गया है। हिंदू पुराणों में जंबुद्वीप का संबंध भारतवर्ष से जोड़ा गया है। कुछ विद्वानों का मानना है कि ‘जंबू’ का अर्थ जामुन का वृक्ष है और ‘द्वीप’ का अर्थ भूभाग या टापू है।
महाभारत के आरण्यक पर्व में जामुन के पेड़ का उल्लेख
बृहत्संहिता, कौटिल्य के अर्थशास्त्र और महाभारत के आरण्यक पर्व में जामुन के पेड़ का उल्लेख मिलता है। रामायण में भी जामुन का जिक्र है। ऐसा माना जाता है कि भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता ने अपने वनवास के दौरान भारी मात्रा में जामुन खाए थे, इसीलिए इस फल को ‘देवताओं का फल’ भी कहा जाता है।
जामुन के पेड़ का हर अंग है उपयोगी
मधुमेह : रक्त में शर्करा (शुगर) के स्तर को नियंत्रित करने के लिए मधुमेह के रोगियों को इस फल का रस दिया जाता है।
तासीर : जामुन शरीर को शीतलता (थंडक) प्रदान करने वाला फल है।
सिरका और वाइन: इसके फलों से वाइन और सिरका भी तैयार किया जाता है। जामुन का सिरका बहुत पौष्टिक होता है और इसमें वायुनाशक (गैस दूर करने वाले) गुण होते हैं।
आयुर्वेद: आयुर्वेद में दस्त (अतिसार) की समस्या में इस पौधे की पत्तियां और छाल बहुत गुणकारी मानी गई हैं।
गुठली का चूर्ण बार-बार पेशाब आने की समस्या में उपयोगी
इसके अलावा, इसकी गुठली का चूर्ण ‘बहुमूत्रता’ (बार-बार पेशाब आने की समस्या) में बहुत उपयोगी साबित होता है। जामुन के मूत्रवर्धक गुणों के कारण यह किडनी से विषाक्त पदार्थों (toxins) को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त जामुन के पेड़ की लकड़ी पानी में भी लंबे समय तक टिकती है।
इसलिए इसका उपयोग निर्माण कार्यों के लिए किया जाता है। जामुन की छाल में मौजूद ‘टैनिन’ के कारण इसका उपयोग चमड़ा रंगने और कमाने के लिए भी होता है।
कम कैलोरी वाला फल
कम कैलोरी वाला आहार लेने वालों के लिए जामुन एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें ग्लूकोज और फ्रुक्टोज की मात्रा बहुत कम होती है। साथ ही, इसमें सुक्रोज (sucrose) न होने के कारण यह मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित लोगों के लिए एक आदर्श फल या स्नैक है। जामुन की गुठली में ‘जॅम्बोलिन’ (Jamboline) और ‘जॅम्बोसिन’ (Jambosine) नाम के सक्रिय तत्व होते हैं।
ये तत्व रक्त में शुगर मिलने की गति को धीमा करते हैं और शरीर में इंसुलिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करते हैं। ये स्टार्च को ऊर्जा में बदलने का काम करते हैं। यही वजह है कि वजन कम करने वाले लोगों को भी अपने आहार में जामुन शामिल करने की सलाह दी जाती है।
फाइबर से भरपूर होता है
जामुन में फाइबर (तंतुमय घटक) प्रचुर मात्रा में होता है। यह फाइबर पुरानी व गंभीर बीमारियों से रक्षा करने, पाचन क्रिया को सुधारने और कब्ज, आंतों के विकार, जी मिचलाना, दस्त और पेचिश (आमांश) जैसी पेट से जुड़ी कई समस्याओं को कम करने में मदद करता है।
इसके अतिरिक्त जामुन के पेड़ की लकड़ी पानी में भी लंबे समय तक टिकती है, इसलिए इसका उपयोग निर्माण कार्यों के लिए किया जाता है। जामुन की छाल में मौजूद ‘टैनिन’ के कारण इसका उपयोग चमड़ा रंगने और कमाने के लिए भी होता है।
जामुन को विटामिन-सी का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। जामुन में मौजूद विटामिन-सी या एस्कॉर्बिक एसिड के एंटीऑक्सीडेंट गुण घावों को जल्दी भरने में मदद करते हैं, साथ ही दांतों, हड्डियों और कार्टिलेज (कूर्चा) को मजबूत बनाते हैं। जामुन को रोग प्रतिरोधक शक्ति (Immunity) बढ़ाने वाला भी माना जाता है, क्योंकि यह सामान्य खांसी, सर्दी, अस्थमा और श्वसन तंत्र के अन्य संक्रामक रोगों से बचाता है। विटामिन-सी के कारण जामुन का नियमित सेवन त्वचा और बालों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद उपयोगी है।
आयरन से भरपूर
जामुन में आयरन (लोह तत्व) की मात्रा अच्छी होने के कारण यह शरीर के लिए अत्यंत फायदेमंद है। एनीमिया (रक्तक्षय/खून की कमी) से पीड़ित व्यक्तियों को जामुन खाने की विशेष सलाह दी जाती है। जामुन में मौजूद प्रचुर मात्रा में आयरन रक्त को शुद्ध करने, लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की संख्या बढ़ाने और हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार करने में मदद करता है।
पारंपरिक रूप से, मासिक धर्म (Periods) के दौरान महिलाओं और लड़कियों को जामुन का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
जामुन को विटामिन-सी का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। जामुन में मौजूद विटामिन-सी या एस्कॉर्बिक एसिड के एंटीऑक्सीडेंट गुण घावों को जल्दी भरने में मदद करते हैं, साथ ही दांतों, हड्डियों और कार्टिलेज (कूर्चा) को मजबूत बनाते हैं। जामुन को रोग प्रतिरोधक शक्ति (Immunity) बढ़ाने वाला भी माना जाता है, क्योंकि यह सामान्य खांसी, सर्दी, अस्थमा और श्वसन तंत्र के अन्य संक्रामक रोगों से बचाता है। विटामिन-सी के कारण जामुन का नियमित सेवन त्वचा और बालों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद उपयोगी है।
आयरन से भरपूर
जामुन में आयरन (लोह तत्व) की मात्रा अच्छी होने के कारण यह शरीर के लिए अत्यंत फायदेमंद है। एनीमिया (रक्तक्षय/खून की कमी) से पीड़ित व्यक्तियों को जामुन खाने की विशेष सलाह दी जाती है। जामुन में मौजूद प्रचुर मात्रा में आयरन रक्त को शुद्ध करने, लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की संख्या बढ़ाने और हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार करने में मदद करता है।
पारंपरिक रूप से, मासिक धर्म (Periods) के दौरान महिलाओं और लड़कियों को जामुन का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
