नई दिल्ली :- इसी स्थान पर लगभग 131 साल पहले स्वामी विवेदानंद ने भी ध्यान लगाया था। जिन्होंने मेडिटेशन और भारतीय संस्कृति को दुनियाभर में पहचान दिलाई। धीरे-धीरे साइंस भी मेडिटेशन को ह्यूमन फंक्शन बढ़ाने का तरीका मानने लगा।
आजकल इंसान का स्वास्थ्य काफी गिर गया है। छोटे-छोटे बच्चे तक हार्ट अटैक, डिप्रेशन, एंग्जायटी, डायबिटीज, कैंसर के शिकार बन रहे हैं। ऐसे में अगर आपको कोई व्यक्ति शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ दिखे तो उसे सुपर ह्यूमन कहना गलत नहीं होगा। आप भी मेडिटेशन करके खुद को सुपर ह्यूमन बना सकते हैं।
भागदौड़ और व्यस्त जीवनशैली की वजह से दिमाग आउट ऑफ कंट्रोल रहने लगा है। चिंता, डिप्रेशन, बेकार इमोशनल हेल्थ, ओवरथिंकिंग की वजह से शरीर पर बहुत बुरा असर पड़ता है। हार्वर्ड कहता है कि मेडिटेशन से दिमाग की फोकस करने की शक्ति बढ़ जाती है। यह नकारात्मक विचारों को काबू करना सीख जाता है।
बार-बार बीमार पड़ना, झुर्रियां, शरीर झुकना, सफेद बाल, डायबिटीज, कमजोर याददाश्त आदि बुढ़ापे के लक्षण हैं। आजकल जवानी में ही इनका सामना करना पड़ रहा है। लेकिन मेडिटेशन से इन सभी समस्याओं को वक्त से पहले आने से रोका जा सकता है।
खाना खाते हुए मोबाइल चलाने से लेकर शराब-धूम्रपान का सेवन करना बुरी आदतों की लिस्ट में आते हैं। यह आपके मानसिक स्वास्थ्य के कमजोर होने की निशानी भी है। ध्यान लगाने से आप दिमाग और मन को बेहतर तरीके से काबू कर पाते हैं और बुरी लतों को छोड़ना आसान हो जाता है।
स्ट्रोक, हार्ट अटैक जैसी खतरनाक बीमारी के पीछे ब्लड प्रेशर प्रमुख कारण होता है। साइंस मानता है कि मेडिटेशन करने से इसे कंट्रोल रखा जा सकता है। इससे नसों के सिकुड़ने की समस्या भी कम की जा सकती है। ध्यान लगाने से अप्रत्यक्ष रूप से शरीर को सभी बीमारी से दूर किया जा सकता है।
हम जितनी देर सोते हैं, उसमें से गहरी नींद का हिस्सा बहुत छोटा होता है। दिमागी थकान और सुस्त जीवनशैली की वजह से यह भी कम हो रहा है। जिसकी वजह से 8-9 घंटे सोने के बाद भी नींद पूरी नहीं होती। मेडिटेशन करने से इस समस्या को खत्म किया जा सकता है
