कर्नाटक :– कांग्रेस में लंबे समय से चल रही सत्ता परिवर्तन की अटकलों के बीच अब बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आता दिख रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई कई दौर की बैठकों के बाद मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने पद छोड़ने पर सहमति जता दी है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत पर जोर दिया और 2023 विधानसभा चुनाव के बाद तय हुए सत्ता साझेदारी फॉर्मूले का हवाला दिया। इस समझौते के तहत मुख्यमंत्री पद को सिद्दारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल के लिए बांटने की बात कही गई थी।
हाईकमान ने पुराने वादे की याद दिलाई
सूत्रों के मुताबिक, सिद्दारमैया ने शुरुआत में दो सप्ताह का समय मांगा था ताकि जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में रखा जा सके, लेकिन पार्टी नेतृत्व तत्काल बदलाव चाहता था। बंद कमरे में हुई चर्चाओं के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पहले किए गए वादों का सम्मान जरूरी है। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी नेतृत्व परिवर्तन के समर्थन में बताए गए। राहुल गांधी ने सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार दोनों से अलग-अलग और संयुक्त रूप से मुलाकात कर पार्टी एकजुट रखने का संदेश दिया।
सिद्दारमैया ने जताई नाराजगी, फिर मानी बात
बैठक में सिद्दारमैया ने यह दलील दी कि 2025 में पद छोड़ने को लेकर कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ था, लेकिन पार्टी नेतृत्व अपने फैसले पर कायम रहा। हाईकमान की ओर से यह भी कहा गया कि सिद्दारमैया लंबे समय तक मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं, इसलिए अब दूसरे नेताओं को मौका देने का समय आ गया है। बाद में उन्होंने वरिष्ठ नेताओं केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला से चर्चा की, जिन्होंने भी केंद्रीय नेतृत्व के फैसले को मानने की सलाह दी।
करीबी सहयोगियों से चर्चा के बाद लिया फैसला
शाम को सिद्दारमैया ने ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज के आवास पर अपने समर्थक नेताओं और मंत्रियों से मुलाकात की। कुछ नेताओं ने उन्हें जल्दबाजी में इस्तीफा न देने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि वह अब और इंतजार नहीं करेंगे। सूत्रों के अनुसार, सिद्दारमैया ने अपने करीबी सहयोगियों से कहा कि वह पहले भी कह चुके हैं कि राहुल गांधी के कहने पर तुरंत पद छोड़ देंगे और अब वही कर रहे हैं।
कांग्रेस के लिए क्यों अहम है यह फैसला
कांग्रेस नेतृत्व इस घटनाक्रम को संगठनात्मक अनुशासन और केंद्रीय नियंत्रण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मान रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में सत्ता साझा करने के मुद्दों पर पार्टी नेतृत्व को चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। ऐसे में कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को हाईकमान की मजबूत पकड़ और केंद्रीय फैसलों की अहमियत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
