कोरबा:– छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर द्वारा संचालित *"सामुदायिक मध्यस्थता मुकदमा मुक्त ग्रामीण भारत"* अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया के परिपालन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई। इस क्रम में चिन्हांकित ग्राम पंचायतों से प्रस्तावित सामुदायिक मध्यस्थों का साक्षात्कार जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा संतोष शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव कुमारी डिंपल द्वारा आयोजित साक्षात्कार प्रक्रिया में ग्राम पंचायतों से चयनित वरिष्ठजन, सेवा निवृत कर्मचारीयों तथा सामाजिक रूप से सक्रिय नागरिकों ने भाग लिया। साक्षात्कार के दौरान प्रतिभागियों को सामुदायिक मध्यस्थ की भूमिका दायित्व एवं ग्रामीण स्तर पर विवादों के सौभाग्यपूर्ण समाधान के महत्व से अवगत कराया गया। साथ ही पैरा लीगल वालंटियर रमाकांत दुबे ने नालसा ,सालसा, डालसा का परिचय कराते हुए कार्यों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की।
एडीआर भवन कोरबा सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित संभावित मध्यस्थों को निर्धारित *पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में* सहभागिता के लिए प्रेरित किया गया। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें संवाद, समझाइश , मध्यस्थता कौशल तथा सामाजिक विवादों के शांतिपूर्ण निराकरण की विधियों का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया जाएगा।
कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ जन एवं सेवा निवृत कर्मचारियों ने इस अभिनव पहल को ग्रामीण समाज में आपसी सौहार्द भाईचारा एवं न्याय सुलभता को बढ़ावा देने वाला कदम बताया। प्रतिभागियों ने सामुदायिक मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका निभाने के प्रति उत्साह व्यक्त करते हुए गांवों में छोटे-मोटे विवादों को न्यायालय पहुंचने से पूर्व ही आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से सुलझाने का संकल्प लिया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मानना है कि समुदायिक मध्यस्थता की यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में मुकदमों की संख्या कम करने सामाजिक समरसता बढ़ाने तथा त्वरित एवं सुलभ न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।