मध्यप्रदेश :- ग्राम रोजगार सहायकों के लिए जबलपुर हाईकोर्ट से बड़ी राहत की खबर है। हाईकोर्ट ने 24 जून 2025 की ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका के अधिकांश प्रावधानों को बरकरार रखते हुए स्थानांतरण से जुड़े नियमों को वैध माना है।
हालांकि प्रशासनिक कारणों से दूरस्थ ग्राम पंचायतों में ट्रांसफर किए जाने वाले रोजगार सहायकों को आर्थिक राहत देने के लिए सरकार को नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त को छह महीने के भीतर ट्रांसफर अलाउंस और मकान किराया भत्ते यानी HRA की व्यवस्था तय करने का आदेश दिया है।
ग्राम रोजगार सहायकों ने मारदर्शिका को दी थी चुनौती
दरअसल मामला ग्राम रोजगार सहायकों की सेवा शर्तों और स्थानांतरण व्यवस्था से जुड़ा है। प्रदेश के पांच ग्राम रोजगार सहायकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 24 जून 2025 की मार्गदर्शिका को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि ग्राम रोजगार सहायक संविदा आधार पर काम करते हैं और उन्हें लगभग 18 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है। ऐसे में प्रशासनिक कारणों से दूरस्थ ग्राम पंचायत में स्थानांतरण होने पर आवास, किराया और आने-जाने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना मुश्किल हो जाता है।
दूर ट्रांसफर होने पर मिलना चाहिए सुविधाएं: हाईकोर्ट
मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ में हुई। अदालत ने मार्गदर्शिका के अधिकांश प्रावधानों को बरकरार रखते हुए स्थानांतरण व्यवस्था को वैध माना लेकिन कर्मचारियों के आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक कारणों से किसी ग्राम रोजगार सहायक को दूरस्थ ग्राम पंचायत में स्थानांतरित किया जाता है, तो उसके स्थानांतरण से जुड़े खर्चों की व्यवस्था होनी चाहिए।
HRA देने के लिए नीति बनाने के निर्देश
इसमें ट्रांसफर अलाउंस के साथ घरेलू सामान और जरूरी वस्तुओं को नए स्थान पर शिफ्ट करने का खर्च भी शामिल होना चाहिए। इसके अलावा नए स्थान पर मकान किराये पर लेने की स्थिति में हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA देने के लिए भी नीति तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
अतिरिक्त प्रभार देने पर भत्ता भी बढ़ाया जाए
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक को दूसरी ग्राम पंचायत का अतिरिक्त प्रभार देकर बिना किसी अतिरिक्त भत्ते के काम कराने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया है। अदालत ने इसे कर्मचारियों के अधिकारों के विपरीत माना है। यानी अतिरिक्त जिम्मेदारी के बदले आर्थिक लाभ देने की व्यवस्था का मुद्दा भी फैसले में महत्वपूर्ण रहा।
6 महीने में नीति बनाकर नियमों को स्पष्ट करे सरकार
हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त को छह महीने के भीतर इस संबंध में नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस नीति में स्थानांतरण भत्ता, मकान किराया भत्ता और घरेलू सामान शिफ्ट करने के खर्च जैसे पहलुओं को शामिल करना होगा। इस फैसले से प्रदेश के करीब 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों की सेवा शर्तों और स्थानांतरण व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर असर पड़ने की संभावना है। हालांकि भत्तों की वास्तविक पात्रता और भुगतान की राशि मध्यप्रदेश सरकार की ओर से तैयार की जाने वाली नीति में स्पष्ट होगी।
