नई दिल्ली: – संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो रहा है। संसद सत्र शुरू पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला न्यूज एजेंसी एएनआई से मुखातिब हुए। इस दौरान उन्होंने लोगों के अधिकारों और पारदर्शिता और संविधान के बारे में बात की। स्पीकर ने कहा कि सरकार चाहे किसी भी पार्टी की विचारधारा की हो संविधान की मूल भावना के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकती।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि लोगों के अधिकारों और पारदर्शिता के लिए समय-समय पर संविधान में परिवर्तन किए गए हैं, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल, किसी भी सरकार ने संविधान की मूल भावनाओं से छेड़छाड़ नहीं की। किसी भी पार्टी की विचारधारा की सरकार हो हम कभी भी संविधान की मूल भावना के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकते हैं।
लोक स्पीकर ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने हमेशा कहा है कि समाज के वंचित, गरीब, पिछड़े लोगों को आज भी सामाजिक आरक्षण की आवश्यकता है। इसलिए उनके जीवन में सामाजिक परिवर्तन हो, उनके जीवन में समृद्धि आए। इसके लिए सरकार संविधान के मूल दर्शन में काम करती है।
ओम बिरला का बयान
20 दिसंबर तक चलेगा सत्र
बता दें कि शीतकालीन सत्र सोमवार यानी आज से शुरू हो रहा है। जो कि 20 दिसंबर तक चलेगा। इस सत्र के लिए वक्फ संशोधन विधेयक समेत 16 विधेयक सूचीबद्ध किए गए हैं। वहीं तमाम मुद्दों को लेकर अलग-अलग दलों को लेकर प्रस्ताव नोटिस देना शुरू कर दिए हैं।
विपक्षियों का ये होगा मुद्दा
विपक्ष मणिपुर में जारी जातीय हिंसा और रिश्वतखोरी के आरोप में व्यवसायी गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिकी अदालत के अभियोग के मुद्दे को उठाना चाहता है। विपक्ष के कई नेताओं ने कहा है कि वे अडानी पर लगे आरोपों का मुद्दा संसद में उठाएंगे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोपों की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराए जाने की मांग की है।
संविधान अंगीकार का 75वीं वर्षगांठ
बैठक में संविधान को अंगीकार किए जाने की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर 26 नवंबर को संविधान सदन पुराने संसद भवन के ‘केंद्रीय कक्ष’ में आयोजित होने वाले कार्यक्रम पर भी चर्चा होने की संभावना है। साथ ही लंबित विधेयकों में वक्फ विधेयक भी शामिल है जिसे दोनों सदनों की संयुक्त समिति द्वारा लोकसभा में अपनी रिपोर्ट सौंपने के बाद विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। समिति को शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।
विपक्षी सदस्य समिति का ये आरोप
समिति के विपक्षी सदस्य समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समयसीमा बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि समिति के अध्यक्ष और भारतीय भाजपा के सांसद जगदंबिका पाल समिति की बैठकों में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से हस्तक्षेप करने की मांग की है। वर्ष 2024-25 के लिए ‘अनुदानों की अनुपूरक मांगों के प्रथम बैच’ पर प्रस्तुति, चर्चा और मतदान को भी सूचीबद्ध किया गया है।
आठ विधेयक लोकसभा और दो राज्यसभा में लंबित
सरकार द्वारा सूचीबद्ध अन्य विधेयक पंजाब न्यायालय (संशोधन) विधेयक है। इसके अलावा, तटीय नौवहन विधेयक और भारतीय बंदरगाह विधेयक को भी पेश और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। वक्फ विधेयक और मुसलमान वक्फ विधेयक समेत आठ विधेयक लोकसभा में लंबित हैं। साथ ही दो अन्य विधेयक राज्यसभा में लंबित हैं।
