पश्चिम बंगाल:- विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए गुरुवार को मतदान हुआ। इस बार अबतक के इतिहास में सबसे अधिक वोटिंग प्रतिशत दर्ज की गई। अब लोगों के मन में सवाल है कि यह किसकी तरफ जाएगा।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण ने एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। 152 सीटों पर लगभग 92.6 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। जो अबतक के इतिहास में सबसे अधिक है। इतने अधिक मतदान होने से राजनीतिक विश्लेषकों और सभी राजनीतिक दलों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर यह भारी मतदान किस ओर संकेत करता है। खास बात यह है कि 2011 में भी जब रिकॉर्ड 85.55% वोटिंग हुई थी तब बड़ा बदलाव देखने को मिला था। उस समय 34 साल पुरानी लेफ्ट फ्रंट सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस बंगाल की सत्ता में आई थी।
ज्यादा वोटिंग, कई जगह हुई झडपें
यह वोटिंग दर 2011 के विधानसभा चुनावों में दर्ज 85.55% और 2024 के लोकसभा चुनावों में 79.8% से कहीं ज्यादा है। यह दर्शाता है कि मतदाताओं में इस बार चुनाव को लेकर जबरदस्त उत्साह है। कुल 3.60 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 1.75 करोड़ महिला वोटर शामिल थीं, जो लोकतंत्र में बढ़ती महिला भागीदारी को भी दर्शाता है। हालांकि, इस भारी मतदान के बीच कुछ जगहों से हिंसा की खबरें भी सामने आई हैं। बीरभूम के दुबराजपुर में केंद्रीय बलों पर पत्थरबाजी की गई, जिसमें कई जवान घायल हो गए। दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज में एक बीजेपी उम्मीदवार पर हमला हुआ, जबकि मुर्शिदाबाद में एक क्षेत्रीय पार्टी के नेता के काफिले को निशाना बनाया गया। इन घटनाओं ने चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।
चुनाव आयोग ने उठाएं कई महत्वपूर्ण कदम
चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए भारत का चुनाव आयोग (ECI) ने अभूतपूर्व कदम उठाए।
100% वेबकास्टिंग, AI आधारित निगरानी और 2,450 केंद्रीय बलों की कंपनियों की तैनाती की गई।
इसके अलावा 8,000 से अधिक पोलिंग स्टेशनों को अति संवेदनशील घोषित किया गया था।
इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में झड़पें होना चुनावी प्रक्रिया की चुनौतियों को उजागर करता है।
कहां पड़े सबसे ज्यादा वोट
मतदान के आंकड़ों पर नजर डालें तो दक्षिण दिनाजपुर में सबसे ज्यादा वोटिंग हुई। इसके बाद कूचबिहार, बीरभूम, मुर्शिदाबाद, जलपाईगुड़ी, पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम का स्थान रहा। इन जिलों में लंबी कतारों में खड़े मतदाता लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते नजर आए। राजनीतिक रूप से भी कई सीटों पर दिलचस्प मुकाबले देखने को मिले। नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी और तृणमूल उम्मीदवार के बीच कड़ा मुकाबला है। वहीं बहरामपुर सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी लंबे समय बाद विधानसभा चुनाव मैदान में हैं।
इतनी बड़ी वोटिंग का क्या मतलब है
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो जब भी ज्यादा मतदान होता है वो बदलाव की इच्छा को दर्शाता है, लेकिन यह सत्ता के समर्थन का संकेत भी हो सकता है। 2011 में उच्च मतदान ने सत्ता परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया था, लेकिन हर चुनाव का संदर्भ अलग होता है। इस बार की भारी भागीदारी यह साफ करती है कि बंगाल का मतदाता बेहद जागरूक है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहा है। अब सभी की नजरें चुनाव परिणामों पर टिकी हैं।
