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    उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता पेश किया गया तो मिले कई सवालों के जवाब…..

    By Tv 36 HindustanFebruary 6, 2024No Comments5 Mins Read
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    जब से समान नागरिक संहिता (UCC) की चर्चा शुरू हुई तब से अलग-अलग धर्मों और कम्युनिटी ने अपनी-अपनी चिंताएं जाहिर करनी शुरू कर दी थीं. सिख समुदाय का मानना था कि यूसीसी लागू हुआ तो अल्पसंख्यकों की पहचान खत्म हो जाएगी. धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुंचेगी. मुस्लिम समुदाय का कहना था कि इससे शरियत से चलने वाला मुस्लिम पर्सनल ला खत्म हो जाएगा. आदिवासियों के तर्क थे कि जमीन पर जो उनका हक है, वो खत्म हो जाएगा. लेकिन जब उत्तराखंड में मंगलवार को इसे पेश किया गया तो कई सवालों के जवाब मिले.

    सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट आशीष पांडे से समझते हैं, सिख, आदिवासी, मुस्लिम और अविवाहितों के लिए यूसीसी बिल में क्या-क्या कहा गया है, उनके सवालों के कितने जवाब बिल में दिए गए हैं.सिख: शादी से पंजीकरण तक कितना कुछ बदलेगा?यूसीसी पर सिखों की शीर्ष संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का कहना था इस कानून से अल्पसंख्यकों की पहचान और धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुंचेगी. यह भी कहा जा रहा था कि आनंद कारज एक्ट में भी बदलाव होगा. वर्तमान में यह कानून के तहत सिखों को विवाह के पंजीकरण कराने की अनुमति देता है.

    आसान भाषा में समझेंयूसीसी में क्या:एडवोकेट आशीष पांडे कहते हैं, उत्तरखंड में पेश हुए यूसीसी बिल में साफ है कि यह किसी भी धर्म के धार्मिक आयोजन और शादी की परंपरा में बदलाव नहीं करता है. फिर चाहें वो सिख धर्म हो या इस्लाम का. जिस तरह सिखों में आनंद कारज एक्ट के तहत शादी होती है वो वैसे ही होगी. मुस्लिमों में काजी ही निकाह पढ़ाएंगे. हिन्दुओं में पंडित की विवाह कराएंगे. मामला अधिकारों को बेहतर करने का है.विशेषज्ञ कहते हैं, बड़ा बदलाव शादी के बाद की चीजों में नजर आएगा. सरकारी फायदे पाने के लिए शादी का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा.

    इसके साथ ही तलाक लेने के नियमों में बदलाव किया गया है. सम्पत्ति बंटवारे में लड़कियों को बराबर के अधिकार मिले जाएंगे. देखा जाए तो उनके अधिकारों में बढ़ोतरी किए जाने की तैयारी है जिनके पास सीमित अधिकार थे. इसलिए ये नियम सिखों में भी लागू होगा, लेकिन उनकी धार्मिक प्रक्रियाओं में कोई बदलाव नहीं होगा

    .मुस्लिम: कितनी आपत्तियां थीं, कितना बदलाव हुआ?यूसीसी को लेकर मुस्लिमों का कहना था कि अगर यह लागू होता है शरियत से चलने वाला मुस्लिम पर्सनल ला खत्म हो जाएगा. इसमें तलाक, शादी, विवाह की उम्र, बच्चा गोद लेने और सम्पत्ति के अधिकार को लेकर कई बातें कही गई हैं, ये प्रावधान खत्म हो जाएंगे. उत्तराखंड का यूसीसी बिल इससे जुड़े कई सवालों के जवाब देता है

    .यूसीसी में क्या: विशेषज्ञ कहते हैं, शरियत के मुताबिक, मुस्लिम कई शादियां कर सकते हैं. नया यूसीसी लागू हुआ तो मुस्लिम भी बिना तलाक एक से ज्यादा शादी नहीं कर सकेंगे. तलाक के लिए एक ही कानून होगा. शरियत में बच्ची की उम्र की शादी की उम्र माहवारी की शुरुआत को माना जाता है, लेकिन यूसीसी में लड़की की शादी की उम्र 18 साल और लड़की की उम्र 21 साल है. शरियत के तहत कोई मुस्लिम इंसान बच्चे को एडॉप्ट नहीं कर सकता है. लेकिन यूसीसी में इसको लेकर भी बदलाव किया गया है.

    हालांकि 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट को लेकर कहा था कि अगर मुस्लिम चाहें तो इस कानून के जरिए बच्चों को गोद ले सकते हैं.अविवाहित: रजिस्टर्ड लिव-इन रिलेशन में पैदा हुए बच्चे का सम्पत्ति में अधिकारअविवाहितों के लिए अब तक कोई बड़े नियम या कानून नहीं थे, खासकर लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों के लिए. कई बाद दूसरे फैसलों को आधार बनाते हुए कोर्ट फैसला सुनाती आई है, लेकिन यूसीसी में इसे भी शामिल किया गया है.

    यूसीसी में क्या:इसको लेकर भी यूसीसी में कई नियम लाए गए हैं. अब तक लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कोई बड़े नियम नहीं थे. अब इसे कानून के के दायरे में लाया जा रहा है. यूसीसी बिल कहता है कि अगर अविवाहित हैं और लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं तो रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. अगर पंजीकरण नहीं कराते हैं तो 10 हजार रुपए का जुर्माना होगा.अगर ऐसे अविवाहित कपल का बच्चा होता है और लिव-इन रिलेशनशिप रजिस्टर्ड है तो पैतृक सम्पत्ति में अधिकार मिलेंगे. लिव-इन रिलेशनशिप में कई बार क्रिमिनल केस होते थे, लेकिन उनकी पर्सनल डिटेल्स रजिस्टर्ड नहीं होती थीं, लेकिन नए बिल में रजिस्ट्रेशन का प्रावधान लाया गया है. इससे क्रिमिनल मामलों में भी उनके बारे में अधिक जानकारी मिल सकेगी

    .लिव-इन रिलेशनशिप में सिर्फ एक व्यस्क पुरुष और वयस्क महिला ही में रह सकेंगे. ध्यान रखने वाली बात है कि वे पहले से विवाहित या किसी दूसरे के साथ लिव-इन रिलेशनशिप या प्रोहिबिटेड डिग्रीस ऑफ रिलेशनशिप में नहीं होने चाहिए. पंजीकरण कराने वाले कपल्स की सूचना रजिस्ट्रार को उनके माता-पिता या अभिभावक को देनी होगी.आदिवासी: कितने बदलेंगे इनके अधिकार?आदिवासियों का कहना था कि यूसीसी के लागू होने से उनसे जुड़े प्रथागत कानून खत्म हो जाएंगे. वर्तमान में संथाल परगना टेनेंसी एक्ट, एसपीटी एक्ट, पेसा एक्ट जैसे कानून के जरिए आदिवासियों को झारखंड में जमीन को लेकर विशेष अधिकार प्राप्त है.

    यूसीसी के लागू होने खत्म हो जाएंगे. यूसीसी के लागू होने पर महिलाओं को सम्पत्ति में बराबर का अधिकार मिलेगा. अगर कोई गैर-आदिवासी एक आदिवासी महिला से शादी करता है तो अगली पीढ़ी की लड़की को जमीन का अधिकार मिल जाएगा.

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