नई दिल्ली:– मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बीच अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर देश के लिए एक सुखद खबर है। दरअसल, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत की जीडीपी (GDP) 7.7 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है। इसके साथ ही जनवरी-मार्च 2026 की आखिरी तिमाही में ग्रोथ अक्टूबर-दिसंबर 2025 के 8 प्रतिशत (पहले के 7.8% के अनुमान से ऊपर) से थोड़ी कम होकर 7.8 प्रतिशत रह गई।
अप्रैल-जून 2025 (6.7% से 6.8%) और जुलाई-सितंबर 2025 (8.4% से 8.3%) के लिए GDP ग्रोथ के अनुमानों में भी मामूली बदलाव किए गए हैं। शुक्रवार को जारी पूरे साल की GDP ग्रोथ का 7.7% का आंकड़ा, जिसे प्रोविजनल अनुमान कहा जाता है, MoSPI के फरवरी में घोषित 7.6% के दूसरे एडवांस अनुमान से ज्यादा।
‘घरेलू मांग में मजबूती, कुछ सेक्टर में नरमी’
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी 7.1 फीसदी बढ़ी थी। ताजा जीडीपी आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2026-27 के लिए अपने अनुमान को 6.9% से घटाकर 6.6% करने के कुछ घंटों बाद आया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी है कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियां बढ़ रही है, लेकिन कुछ सेक्टर में नरमी के शुरुआती संकेत हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक के नए अनुमान के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 में ग्रोथ 6.6%, जुलाई-सितंबर 2026 में 6.3%, अक्टूबर-दिसंबर 2026 में 6.5% और जनवरी-मार्च 2027 में 6.8% रहने का अनुमान है। अप्रैल में केंद्रीय बैंक ने उम्मीद जताई थी कि 2026-27 की चार तिमाहियों में देश की जीडीपी में 6.8%, 6.7%, 7% और 7.2% की बढ़ोतरी होगी।
इन सेक्टरों में दिखी तेज ग्रोथ
वित्त वर्ष 2025-26 में मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार, मरम्मत, होटल, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन और ब्रॉडकास्टिंग व स्टोरेज से जुड़ी सेवाएं और फाइनेंशियल, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सेवाएं सेक्टर में कॉन्स्टेंट और करंट, दोनों तरह की कीमतों पर दोहरे अंकों की ग्रोथ दर्ज की गई है। खर्च के नजरिए से देखें तो, वित्त वर्ष 2025-26 में प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PFCE) और ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF), दोनों में 7.5% से ज़्यादा की ग्रोथ रेट देखी गई है।
नए बेस ईयर के आधार पर आंकड़े
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह नए साल और तिमाही जीडीपी अनुमान 27 फरवरी, 2026 को जारी की गई नई सीरीज के आधार पर तैयार किए गए हैं, जिसमें बेस ईयर (Base Year) को बदलकर 2022-23 कर दिया गया है। ऐसा कहा जा रहा है कि चौथी तिमाही में 7.8% की यह वृद्धि दर आने वाले समय में देश के औद्योगिक उत्पादन, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
