भोपाल:– बहुचर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। हाईकोर्ट ने भोपाल की सत्र अदालत द्वारा दिए गए जमानत आदेश को गंभीर खामियों वाला बताते हुए साफ कहा कि दहेज मृत्यु जैसे संवेदनशील मामलों में साक्ष्यों की गहराई से जांच जरूरी है। इस फैसले के बाद पूर्व जज गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी की संभावना तेज हो गई है और सीबीआई जांच भी अब और आक्रामक हो सकती है।
न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की अवकाशकालीन पीठ ने अपने 17 पन्नों के आदेश में कहा कि निचली अदालत ने केस डायरी, गवाहों के बयान और व्हाट्सऐप चैट जैसे अहम डिजिटल साक्ष्यों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। कोर्ट ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं 80(2), 85, 3(5) और दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं के तहत यह गंभीर अपराध बनता है, ऐसे में अग्रिम जमानत देने से पहले सभी तथ्यों का सावधानीपूर्वक परीक्षण जरूरी था।
इस मामले में सीबीआई ने खुद को पक्षकार बनाते हुए कोर्ट में कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपी से हिरासत में पूछताछ बेहद जरूरी है। राज्य सरकार और सीबीआई दोनों ने तर्क दिया कि आरोपी की गिरफ्तारी निष्पक्ष जांच के लिए आवश्यक हो सकती है। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलना चाहिए।
दरअसल ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को गिरिबाला सिंह के बेटे समर्थ सिंह से हुई थी। शादी के महज पांच महीने बाद 12 मई 2026 को ट्विशा का शव भोपाल के कटारा हिल्स स्थित घर में फांसी पर लटका मिला था। घटना के बाद मृतका के परिवार ने दहेज प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और हिंसा के गंभीर आरोप लगाए थे।
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में दावा किया कि व्हाट्सऐप चैट्स में पति और ससुराल पक्ष द्वारा मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना के संकेत मिले हैं। मृतका के पिता ने आरोप लगाया कि ट्विशा पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया और उसके चरित्र पर भी सवाल उठाए जाते थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी के अलावा शरीर पर छह चोटों के निशान मिलने और एम्स की रिपोर्ट में इन चोटों को संदिग्ध बताए जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि अग्रिम जमानत मिलने के बाद गिरिबाला सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मृतका की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की और जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा व्यवहार जांच को प्रभावित कर सकता है।
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने दहेज मृत्यु को गंभीर सामाजिक बुराई बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कानून को बेहद सख्ती से लागू करने की जरूरत है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि यदि जमानत आदेश साक्ष्यों की अनदेखी पर आधारित हो, तो उसे रद्द किया जा सकता है।
फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत जताई है। परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि आखिरकार ट्विशा को न्याय मिलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। वहीं अब गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी या कोर्ट में आत्मसमर्पण की संभावना बढ़ गई है। सीबीआई आने वाले दिनों में मामले में कई बड़े खुलासे कर सकती है।
