नई दिल्ली:– संसद का मानसून सत्र इस वर्ष 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोकसभा और राज्यसभा की बैठक बुलाने को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी आधिकारिक जानकारी साझा की।
करीब तीन सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे सदन के पटल पर रख सकती है। इसके अलावा विभिन्न नीतिगत फैसलों और समसामयिक विषयों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
राजनीतिक घटनाक्रम पर भी रहेगी नजर
इस बार का मानसून सत्र बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की चुनावी सफलता के बाद आयोजित हो रहा है। वहीं तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हुए राजनीतिक घटनाक्रम भी सदन में चर्चा का विषय बन सकते हैं। दोनों दलों के बागी सांसदों को अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने की मांग पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले का भी इंतजार है।
राज्यसभा में मजबूत हुआ एनडीए का आंकड़ा
हाल ही में राज्यसभा के नए और पुनर्निर्वाचित सदस्यों के शपथ लेने के बाद उच्च सदन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की स्थिति पहले की तुलना में और मजबूत हुई है। ऐसे में सरकार को कई विधेयकों को पारित कराने में सहूलियत मिलने की उम्मीद है।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर रह सकती है चर्चा
पिछले संसद सत्र में सरकार को उस समय झटका लगा था, जब लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। इस विधेयक का उद्देश्य वर्ष 2029 से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के साथ लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना था।
सूत्रों के अनुसार, सरकार अब संशोधित मसौदे पर काम कर रही है। नए प्रस्ताव में सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में लगभग 50 प्रतिशत तक समान वृद्धि का विकल्प शामिल किया जा सकता है। आबादी के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण को लेकर दक्षिण भारत के कई राजनीतिक दल पहले ही अपनी चिंता जता चुके हैं।
