रायपुर:-
रायपुर में साइबर ठगों का हाईटेक खेल—अब पुलिस के रडार पर गिरोह
रायपुर में एक बार फिर “जल्दी अमीर बनने” का सपना एक महिला डॉक्टर के लिए डरावना सच बन गया। सफेद कोट पहनकर मरीजों की जान बचाने वाली यह डॉक्टर खुद साइबर ठगों के ऐसे जाल में फंसी, जहां हर क्लिक उसे मुनाफे की ओर नहीं… बल्कि ठगी के अंधे कुएं की तरफ ले जा रहा था।
शुरुआत बेहद मासूम थी—एक मैसेज, फिर कॉल, और फिर “गोल्डन मौका”… शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ऐसा जाल बुना गया कि डॉक्टर को लगा अब पैसा ही पैसा होगा। ठगों ने उसे एक “प्रोफेशनल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म” से जोड़ दिया। स्क्रीन पर आंकड़े नाच रहे थे, ग्राफ ऊपर जा रहे थे… और हर मिनट बढ़ता “फर्जी मुनाफा” उसके भरोसे को मजबूत करता जा रहा था।
लेकिन यहीं से शुरू हुआ असली खेल…
डॉक्टर ने एक-दो बार छोटी रकम लगाई—और उसे ऐप पर “मुनाफा” दिखाया गया। यही वो ट्रिक थी, जिससे ठगों ने उसका विश्वास पूरी तरह जीत लिया। इसके बाद उन्होंने बड़े निवेश का दबाव बनाया। “अभी मौका है… अभी डालिए… दोगुना मिलेगा…” जैसे लालच भरे शब्दों ने उसे 1.51 लाख रुपये तक ट्रांसफर करने पर मजबूर कर दिया।
क्लाइमेक्स में आया असली ट्विस्ट—
जब डॉक्टर ने अपना पैसा निकालने की कोशिश की, तो सिस्टम अचानक बदल गया।
पहले “टेक्निकल इश्यू”… फिर “टैक्स जमा करो”… और आखिर में—अकाउंट ही ब्लॉक!
जिस स्क्रीन पर मुनाफा चमक रहा था, वही अब सन्नाटा दिखा रही थी। कॉल बंद, नंबर स्विच ऑफ, और व्हाट्सऐप ग्रुप गायब… तब जाकर एहसास हुआ—यह निवेश नहीं, सुनियोजित ठगी थी।
पीड़िता ने सिटी कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने धोखाधड़ी और साइबर अपराध की धाराओं में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच में अब फोकस है—
- किन बैंक खातों में पैसा गया
- किस नेटवर्क से कॉल और मैसेज किए गए
- और इस पूरे गिरोह की लोकेशन क्या है
सूत्र बताते हैं कि यह कोई छोटा फ्रॉड नहीं, बल्कि संगठित साइबर गैंग का हिस्सा हो सकता है, जो फर्जी ऐप और अंतरराष्ट्रीय सर्वर के जरिए लोगों को निशाना बनाता है।
रायपुर में बढ़ता साइबर जाल
यह कोई पहला मामला नहीं है। रायपुर और आसपास के इलाकों में हाल के महीनों में शेयर ट्रेडिंग, फॉरेक्स और “AI इन्वेस्टमेंट” के नाम पर ठगी के कई केस सामने आए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि डॉक्टर, इंजीनियर और पढ़े-लिखे लोग भी इस जाल में फंस रहे हैं—क्योंकि ठग अब टेक्नोलॉजी और मनोविज्ञान दोनों का खेल खेल रहे हैं।
पुलिस की चेतावनी (इसे हल्के में न लें)
- “जल्दी और ज्यादा मुनाफा” = सबसे बड़ा रेड सिग्नल
- अनजान ऐप या लिंक पर पैसा डालना मतलब खतरे को न्योता देना
- केवल SEBI रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म पर ही भरोसा करें
- किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें
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रायपुर की यह घटना सिर्फ एक ठगी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—आज का साइबर अपराधी बंदूक नहीं, बल्कि “भरोसे” से वार करता है। और जब तक सच्चाई सामने आती है… तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
